अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की टिकट की श्रेणी कम किए जाने पर विमान द्वारा तय की गई दूरी के आधार पर टिकट कीमत के 30 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक (कर सहित) भरपाई की जाएगी. एयरलाइन कंपनियों को घरेलू उड़ानों की टिकट निचली श्रेणी में यानी डाउनग्रेड करने पर प्रभावित यात्री को टिकट की कीमत का 75 प्रतिशत वापस लौटाना होगा. इस संबंध में नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने आदेश दिया है. नया नियम 15 फरवरी 2023 से प्रभावी होगा. यानी कि अगर एयरलाइंस किसी यात्री को जिस क्लास में उसका टिकट है, उससे कमतर श्रेणी में यात्रा करने को कहती हैं तो उसे यात्री को टिकट के पैसे रीइंबर्स करने होंगे.
मिल रही थी शिकायत
डीजीसीए को हवाई यात्रियों से इस तरह की शिकायतें मिल रही थीं कि एयरलाइंस उनके द्वारा बुक कराए गए टिकट की श्रेणी में बदलाव कर देती है. डीजीसीए ने पिछले साल दिसंबर में प्रस्ताव दिया था कि एयरलाइन कंपनियों को ऐसी टिकटों की कर समेत पूरी कीमत लौटानी चाहिए और प्रभावित यात्री को अगली उपलब्ध श्रेणी में नि:शुल्क यात्रा करानी चाहिए. अधिकारी ने कहा कि हालांकि इन प्रस्तावों को अंतरराष्ट्रीय नियमों के हिसाब से संशोधित कर दिया गया है.
रीइंबर्समेंट में ऐसे मिलेगा पैसा
डीजीसीए ने सिविल एविएशन रेग्युलेटर में संशोधन करते हुए बोर्डिंग से इंकार करने, उड़ानों को रद्द करने और उड़ानों में देरी के कारण विमानन कंपनियों द्वारा यात्रियों को प्रदान की जाने वाली सुविधाओं में बदलाव किया है. एक अंतरराष्ट्रीय टिकट की श्रेणी कम होने की स्थिति में एक यात्री को 15 सौ किलोमीटर या उससे कम की उड़ान भरने वाली उड़ानों के लिए कर सहित टिकट की लागत की 30 प्रतिशत राशि मिलेगी. यदि उड़ान 15 सौ से 35 सौ किमी के बीच की दूरी तय करती है तो कर सहित यह राशि 50 प्रतिशत होगी. 35 सौ किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने वाली उड़ानों के लिए प्रतिपूर्ति राशि कर सहित टिकट की लागत का 75 प्रतिशत होगी.