आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) ने ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के इलाज के लिए एक खास डिवाइस तैयार की है. इस मशीन से ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को जल्द रिकवर होने में मदद मिलेगी. इसके अलावा ये डिवाइस स्ट्रोक (Brain Stroke Patient) के एक साल बाद भी मरीज को ठीक करने में मदद करती है.
आम तौर पर ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में फिजियोथेरेपी ही एकमात्र विकल्प होता है. आईआईटी कानपुर द्वारा बनाई गई ये डिवाइस मरीज की तेज रिकवरी तो करेगी ही. इसके अलावा रिकवरी को बेहद आसान भी बनाएगी.
आईआईटी कानपुर की ये डिवाइस मरीज के दिमाग और शरीर के बीच तालमेल बनाने में मदद करती है. भारत और यूके में इस मशीन का सफल परीक्षण हो चुका है. जल्द ही ये डिवाइस बाजार में आएगी. आइए इस खास डिवाइस के बारे में जानते हैं.
क्यों होता है ब्रेन स्ट्रोक?
दिमाग शरीर का सबसे जरूरी अंग होता है. इसका हेल्दी रहना बेहद जरूरी होता है. ब्रेन स्ट्रोक की वजह से शरीर के कुछ हिस्से काम करना बंद कर देते हैं. आसान भाषा में इसे लकवा भी कहते हैं. भारत में ब्रेन स्ट्रोक के मामले काफी ज्यादा है.
ब्रेन स्ट्रोक अचानक आता है लेकिन इसके पीछे कुछ वजहें होती हैं. जब ब्रेन के सेल्स मर जाते हैं तो ब्रेन स्ट्रोक होता है. ब्रेन स्ट्रोक दो वजहों से होता है. पहला तो दिमाग की आर्टरी के ब्लॉक होने से ये समस्या होती है. दूसरा ब्रेन की आर्टरी टूट जाने से भी स्ट्रोक आता है.
IIT कानपुर की डिवाइस
ब्रेन स्ट्रोक की वजह से व्यक्ति के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं. इन शरीर का कनेक्शन दिमाग से टूट जाता है. ब्रेन स्ट्रोक के मरीज के लिए फिजियोथेरेपी सबसे अच्छा ट्रीटमेंट माना जाता है. फिजियोथेरेपी की मदद से मरीज धीरे-धीरे रिकवर होने लगता है.
कई बार ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को फिजियोथेरेपी से मदद नहीं मिलती है. ऐसे मरीजों के लिए आईआईटी कानपुर की डिवाइस एक वरदान साबित होगी. आईआईटी कानपुर ने ब्रेन कंट्रोल इंटरफेस (BCI) नाम की डिवाइस बनाई है. इस मशीन से ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की तेज रिकवरी होगी.
कैसे काम करेगी मशीन?
ब्रेन स्ट्रोक की इस मशीन का सफल ट्रायल भारत और यूके में हो चुका है. फिलहाल, देश के अपोलो अस्पताल में इसका परीक्षण चल रहा है. इसके बाद ये डिवाइस मरीज बाजार में आएगी. आईआईटी कानपुर की ये मशीन ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के लिए वरदान साबित होगी.
आईआईटी कानपुर की इस इलाज में ब्रेन स्ट्रोक के मरीज को को EEG कैप पहनाई जाती है. इसके बाद इस मशीन की मदद से मरीज के हाथ का मोशन कराया जाता है. मरीज का फोकस हाथ के मोशन पर है या नहीं, इसका पता चल जाता है. इससे मरीज अपना फोकस करता है. इस तरह से ब्रेन स्ट्रोक की मरीज का रिकवरी तेज होती है.