दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में मौजूद दर्शकों का जोश उस वक्त चरम पर था, जब पंजाब की जसप्रीत कौर ने पावरलिफ्टिंग के 45 किलो कैटेगरी में 101 किलो वजन उठाकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया. ये रिकॉर्ड उन्होंने अपने ही पिछले रिकॉर्ड 100 किलो को तोड़कर बनाया. जिसको उन्होंने कुछ दिन पहले ही नेशनल्स में बनाया था. जसप्रीत की यह सफलता उन्हें एक दिन में नहीं मिली. उनका सफर काफी कठिनाइयों और संघर्षों से भरा रहा है.
क्या है जसप्रीत की कहानी
एक समय था जब जसप्रीत कौर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हुआ करती थीं. उस समय उनका वजन 82 किलो तक पहुंच चुका था. जिसके बाद डॉक्टरों ने उनके वजन को लेकर उन्हें चेतावनी दी थी. साथ ही जसप्रीत कौर को शारीरिक डिसएबिलिटी भी है.
डॉक्टरों का कहना था कि अगर उन्होंने वजन कम नहीं किया तो उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. लेकिन जसप्रीत ने हार नहीं मानी. उन्होंने खुद से पोषण और डाइट की स्टडी की, अपनी दिनचर्या बदली और मात्र डेढ़ साल में 40 किलो वजन कम किया.
कब बनीं पावरलिफ्टर
साल 2022 में जसप्रीत को पैरा पावरलिफ्टिंग के बारे में जानकारी मिली. उन्होंने पंजाब के पैरालंपिक पावरलिफ्टिंग स्टार राजिंदर सिंह रहेलू और परमजीत कुमार से संपर्क किया. और खेल में करियर बनाने का फैसला किया. अपनी पहली ही राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने 70 किलो वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता. इसके बाद उन्हें स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के गांधीनगर सेंटर में ट्रेनिंग का मौका मिला.
जसप्रीत लोगों के लिए बनीं प्रेरणा
जसप्रीत कौर की यह उपलब्धि सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि उन सभी के लिए प्रेरणा है जो किसी भी कठिनाई के आगे हार मानने की सोचते हैं. एक साधारण इंजीनियर से राष्ट्रीय रिकॉर्ड होल्डर बनने का सफर आसान नहीं था, लेकिन जसप्रीत ने दिखा दिया कि अगर हिम्मत और जुनून हो, तो कुछ भी असंभव नहीं है. अब पूरा देश उनके लॉस एंजेलेस 2028 पैरालंपिक्स में मेडल जीतने के सपने को सच होते देखने का इंतजार कर रहा है.