एआई हमारी दुनिया को बहुत तेजी से चेंज कर रहा है. मेडिकल इंडस्ट्री पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है. मेडिकल इंडस्ट्री में एआई से जुड़ी एक नई क्रांति आने वाली है, या यूं कहें कि आ चुकी है. अगली बार जब आप मेडिकल टेस्ट के लिए जाएं, तो हो सकता है कि आपको किसी AI नर्स का कॉल आए. और तब ये AI नर्स एक फ्रेंडली टोन में Appointment के लिए आपकी हेल्प करेगी. और हो सकता है आपके किसी सवाल का जवाब भी दे. हम इस एआई नर्स के बारे में विस्तार से बताएं, उससे पहले एक बात बता दें कि भारत और अमेरिका सहित दुनिया भर के कई देशों में एआई नर्सेस को लेकर प्रयास शुरू हो चुके हैं.
Medical Industry में AI Nurses की एंट्री!
Hippocratic AI नाम की अमेरिकी कंपनी ने नए एआई नर्सेस को लॉन्च किया है. इस AI नर्स को पेशेंट्स को कंफर्टेबल महसूस कराने के लिए ट्रेनिंग दी गई है. ये हिंदी भी बोल सकती है और हैतियन क्रियोल जैसी कम बोली जाने वाली भाषा भी में भी बात कर सकती है. ये 24X7 अवेलेबल रहती हैं.
बड़ी बात ये है कि ये एआई नर्सेस, ह्युमन नर्सेस और मेडिकल हेल्प के किए जाने वाले Time-Consuming Tasks को Automate करने के कई तरीके भी उपलब्ध करा सकती है. ये नया स्टेप ये बताता है कि आज हॉस्पिटल्स पर बढ़ते बोझ की वजह से वो तेजी से एआई का रुख कर रहे हैं.
भारतीय अस्पतालों में भी AI Nurses
ये तो बात हुई अमेरिका की, लेकिन Indian Hospitals भी एआई के इस्तेमाल में पीछे नहीं है. अपोलो अस्पताल को लेकर ऐसी खबर आई है कि Diagnostic Accuracy को बढ़ाने, पेशेंट्स में Risk Of Complications को प्रिडिक्ट करने, Robotic Surgeries में सटीकता सुधारने, Virtual Medical Care Offer करने और Hospital Operations को Streamline करने के लिए वहां एआई का इस्तेमाल शुरू हो चुका है. अपोलो ने अपने कुल डिजिटल खर्च का साढ़े 3 फीसदी एआई पर खर्च करने का फैसला भी कर लिया है.
आज दुनिया भर में अस्पतालों का मानना है कि एआई, ह्युमन नर्सेस को ज्यादा Efficiently काम करने में हेल्प कर रहा है, साथ ही थकान और स्टाफ की कमी को भी दूर कर रहा है.
कैसे मदद करेंगी AI नर्सेस
बात अगर इंडिया की करें, तो यहां बीमारी का जल्दी पता लगाने के लिए एक्स-रे, एमआरआई और सीटी स्कैन किया जाता है. जिससे कैंसर, टीबी और हार्ट डिजीज का जल्दी पता लगाने में मदद मिलती है. रिमोट या ग्रामीण इलाकों में, जहां डॉक्टरों की कमी है, AI टेलीमेडिसिन और चैटबॉट्स के जरिए पेशेंट्स को सलाह दे रहा है. AI अस्पतालों में बेड मैनेजमेंट, स्टाफ शेड्यूलिंग और पेशेंट्स के रिकॉर्ड को दुरुस्त करने में मदद कर रहा है. इससे टाइम और रिसोर्सेस की बचत हो रही है. और तो और भारत की फार्मा कंपनियां AI का इस्तेमाल नई दवाओं की रिसर्च और सस्ते जेनेरिक दवाओं के प्रोडक्शन में भी कर रही हैं.
बात करें AI नर्सेस की, तो ये अलग-अलग रूप में अलग-अलग जगहों पर इस्तेमाल की जा रही हैं. जैसे अमेरिका के मेयो क्लिनिक में AI नर्सेस पेशेंट्स की मॉनिटरिंग के लिए इस्तेमाल की जाती हैं. ये सिस्टम 'प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स' का इस्तेमाल करके गंभीर स्थिति का पहले से अनुमान लगा लेती हैं. AI पेशेंट्स के डेटा को रियल-टाइम में एनालाइज करता है और नर्सेस को अलर्ट भेजता है.
बीमारियों का जल्दी पता लगा रहे हैं Diagnostic Software
जापान में टोक्यो के अस्पतालों में AI नर्सेस ओल्ड ऐज पेशेंट्स की केयर के लिए काम कर रही हैं. उदाहरण के तौर पर, 'रोबोटिक नर्सिंग सिस्टम' जैसे Pepper रोबोट पेशेंट्स से बात करते हैं, उन्हें मैडिसिन का टाइम याद दिलाते हैं और मेंटल हेल्थ को भी मॉनिटर करते हैं.
भारत के बड़े शहरों जैसे दिल्ली और मुंबई के अस्पतालों में AI नर्सें रेडियोलॉजी में हेल्प कर रही हैं. ये एक्स-रे और सीटी स्कैन को स्कैन करके कैंसर या फेफड़ों की बीमारियों का जल्दी पता लगाती हैं.
AI Nurses को लेकर विरोध
वहीं सिंगापुर में AI वर्चुअल नर्सेस काम कर रही हैं, वहां Ask Nurse Alice चैटबॉट खासा इस्तेमाल किया जा रहा है. ये चैटबॉट पेशेंट्स से ऑनलाइन इंटरैक्शन करती है. ये लक्षणों के बेसेस पर सलाह देती हैं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से अपॉइंटमेंट बुक करती हैं. दुनिया भर में एआई नर्सों का इस्तेमाल अलग-अलग तरह से हो रहा है, लेकिन इन्हें लेकर विरोध की आवाजें भी सुनाई दे रही हैं.नर्सिंग यूनियन्स का मानना है कि ये टेक्नोलॉजी नर्सों की एक्सपर्टीज़ को खत्म कर रही हैं और मरीजों को मिलने वाली Quality Of Care को भी घटा रही हैं.
आखिर क्यों उठ रहा है विरोध
अमेरिका में नेशनल नर्सेज यूनाइटेड की मिशेल महोन ने एक न्यूज प्लेटफॉर्म से कहा है कि एआई से जुड़ा ये पूरा Ecosystem चीज़ों को Automate करने, Skill कम करने और आखिर में नर्सेस को रिप्लेस के लिए डिज़ाइन किया गया है.
ये तो बात हुई विरोध की, लेकिन एआई की भी अपनी लिमिटेशंस हैं. और यही बात सामने आई एक खबर के जरिए. अमेरिका के नेवाडा में एडम हार्ट Dignity Health के Emergency Room में काम कर रहे थे, इसी दौरान अस्पताल के कंप्यूटर सिस्टम ने एक नए पेशेंट को Sepsis के लिए Flag किया.
Human Nurses क्यों है जरूरी?
बता दें कि सेप्सिस तब होता है, जब किसी Infection को रोकने के लिए खून में छोड़े गए Chemicals पूरे शरीर में सूजन पैदा कर देते हैं. इससे अलग-अलग अंगों को नुकसान पहुंचाने वाले कई बदलाव शुरू हो सकते हैं. इसकी वजह से शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं और कभी-कभी जान भी जा सकती है.
इसके इलाज के लिए ऐंटीबायोटिक मैडिसिंस और ड्रिप की हेल्प से नसों में IV Fluids इंजैक्ट किए जाते हैं. हॉस्पिटल के प्रोटोकॉल के मुताबिक, तो उन्हें तुरंत IV Fluids की बड़ी खुराक देनी थी. लेकिन Hart को ये पता चल गया था कि पेशेंट डायलिसिस या किडनी फेलियर से पीड़ित है. ऐसे पेशेंट के अंदर Fluids इंजेक्ट होने से उनकी Kidneys Overload हो सकती है, ऐसे में उनका खास ध्यान रखकर ट्रीटमेंट करना होता है.
Human Nurses पेशेंट के मुताबिक करती हैं ट्रीटमेंट!
हार्ट ने ये परेशानी Supervising Nurse के सामने रखी, इसके बाद उन्हें Standard Protocol Follow करने के लिए कहा गया. जिसके बाद पास के एक Physician ने इंटरवीन किया और इसके बाद पेशेंट को IV Fluids का Slow Infusion दिया जाने लगा.
अब आपको सुनाते हैं एक्सपर्ट का वर्जन. लोयोला यूनिवर्सिटी के नर्सिंग कॉलेज की डीन मिशेल कोलिन्स कहती हैं कि सबसे Sophisticated Technology भी उन संकेतों को नहीं पकड़ पाती जिन्हें नर्सेस आमतौर पर पहचान लेती हैं, जैसे चेहरे के भाव और गंध.
Human Nurses पहचान सकती हैं चेहरे का भाव और गंध!
कोलिन्स ने कहा कि ह्युमन नर्सेस से पूरी तरह मुंह मोड़ना मूर्खता होगी. हमें इस बात को स्वीकार करना चाहिए कि एआई हमारे हेल्थकेयर में क्या बेहतर कर सकता है, लेकिन हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि यह Human Element की जगह न ले ले. और यही हमारा भी मानना है.
आइए अब बताते हैं एआई की कुछ गुड न्यूज. कुछ ऐसे एआई के बारे में जिनके बारे में खुश खिल उठेंगे चेहरें.
Physical Intelligence AI
क्या आपको पता है कि Physical Intelligence AI नाम का एक ऐसा टूल है, जो आपके कपड़ों को तह कर सकता है, कॉफी बीन्स निकाल सकता है और कार्डबोर्ड बॉक्स जोड़ सकता है. ये रोबोट को रियल वर्ल्ड में काम करने के लिए तैयार कर रहा है, जिससे घरेलू काम आसान हो सकते हैं.
BrainPredict AI
BrainPredict AI नाम के एआई टूल ने दिमाग की कमजोरी को पहले से पहचानने में सफलता हासिल की है. ये डिमेंशिया जैसी बीमारी का इलाज जल्दी शुरू करने में हेल्प करेगा. भारत और दूसरे देशों में इसे अस्पतालों में लाने की तैयारी हो रही है.
भारत में EduAI की शुरुआत
भारत में हाल में EduAI नाम का एक AI टूल शुरू हुआ है. ये गांव के बच्चों को पढ़ाई में हेल्प करेगा. ये टूल हर बच्चे की पढ़ाई को समझकर उनके लिए खास Lesson तैयार करता है.
Alibaba Emotion AI
चीन की कंपनी अलीबाबा ने Alibaba Emotion AI नाम का टूल लॉन्च किया. ये लोगों के इमोशंस को समझ सकता है, जैसे कोई खुश है या दुखी. इसका इस्तेमाल ऑनलाइन सर्विसेज में कस्टमर्स को बेहतर तरीके से समझने के लिए किया जा सकता है.