मंगल ग्रह को लेकर पिछले कई सालों से स्टडी चल रही है. मंगल ग्रह को धरती जैसी दुनिया में बदलने की कोशिश की जा रही है. मंगल ग्रह को एक ऐसी जगह में बदलने का विचार किया जा रहा है, जहां आखिरकार इंसान रह सकें. वैज्ञानिक मंगल ग्रह को गर्म और रहने लायक बनाने के लिए नए तरीकों की खोज की जा रही है. मंगल के वातावरण को धरती जैसा बनाने की कोशिश जारी है.
मंगल ग्रह को किया जाएगा गर्म
वैज्ञानिक मंगल ग्रह को गर्म करने के लिए एक नए तरीके पर काम कर रहे हैं. इस मेथड में छोटे, इंजीनियर्ड पार्टिकल्स को मंगल ग्रह के वातावरण में छोड़ा जाएगा. इन्हें ग्लिटरिंग पार्टिकल्स कहा जा रहा है.
ये पार्टिकल्स लोहे या एल्यूमीनियम जैसी मटेरियल से बने हैं, जिसने एरोसोल के रूप में वातावरण में छिड़का जाएगा. ऐसा करने के पीछे उद्देश्य है कि मंगल की सतह पर गर्म को रोका जा सके और सूरज की रोशनी को बिखेरा जा सके.
इसका लक्ष्य दस साल में मंगल की सतह के तापमान को लगभग 50 डिग्री फारेनहाइट (28 डिग्री सेल्सियस) तक बढ़ाना है. हालांकि केवल इसी से ही लाल ग्रह को रहने लायक नहीं बनाया जा सकेगा. इसके लिए दूसरे कदम भी उठाए जा रहे हैं.
शिकागो यूनिवर्सिटी के लीड रिसर्चर डॉ. एडविन काइट बताते हैं, “टेराफॉर्मिंग का मतलब किसी ग्रह के पर्यावरण में बदलाव करके उसे पृथ्वी जैसा बनाना है. मंगल ग्रह के लिए, ग्रह को गर्म करना एक जरूरी काम है.”
यह नया तरीका क्यों?
मंगल ग्रह को गर्म करने के लिए पहले भी कई तरीकों पर विचार किया गया है. पिछले तरीकों में से एक ग्रीनहाउस गैसों का उपयोग है. इसके लिए बहुत सारे रिसोर्स की जरूरत होती है. ये मंगल ग्रह पर काफी मुश्किल है. नया प्रस्ताव नैनोकणों का उपयोग शामिल है.
नैनोकणों का उपयोग करना सुनने में आकर्षक लग सकता है, लेकिन इसे लागू करना काफी मुश्किल है. हालांकि, इसमें कम संसाधन इस्तेमाल होंगे. मंगल ग्रह पर भारी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें लाने की कोशिश करने के बजाय, वैज्ञानिक इन छोटे कणों को ग्रह की सतह पर भेज सकते हैं. मंगल ग्रह पर लोहा और एल्यूमीनियम पहले से ही काफी मात्रा में हैं, ऐसे में इस तरीके को अपनाना आसान है.
मंगल ग्रह पर हैं कई चुनौतियां
मंगल ग्रह पर रहने लायक वातावरण बनाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है:
1. मंगल ग्रह का वातावरण बहुत पतला है जो मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड से बना है, जो मनुष्यों के सांस लेने के लिए उपयुक्त नहीं है.
2. सूर्य की किरणों को फिल्टर करने के लिए घने वातावरण के बिना, मंगल की सतह पर अल्ट्रावायलेट रेडिएशन काफी ज्यादा है.
3. मंगल ग्रह की मिट्टी पर फसल उगाना मुश्किल हो जाता है।
4. मंगल ग्रह पर लगातार और बड़े पैमाने पर धूल भरी आंधियां आती हैं जो ग्रह के बड़े क्षेत्रों को कवर कर सकती हैं.
5. मंगल ग्रह काफी ज्यादा ठंडा है, जिसकी औसत सतह का तापमान लगभग माइनस -85 डिग्री फ़ारेनहाइट (माइनस -65 डिग्री सेल्सियस) है. ऐसे में इंसानों का रहना काफी मुश्किल है.