नाम बदलने का फैसला लेने के बाद फेसबुक ने एक और फैसला लिया है. अब कंपनी ने फेस रिकग्निशन सिस्टम को बंद कर दिया है. इसके लिए फेसबक एक अरब से भी ज्यादा लोगों का फेसप्रिंट डिलीट कर देगा. फेसबुक ने यह कदम दुनियाभर में इस तकनीक को लेकर जताई जा रही चिंता के बाद उठाया है. इस तकनीक में फोटो और वीडियो के जरिये लोगों को आसानी से पहचान लिया जाता है.
फेसबुक (मेटा) ने हटाया फेस रिकग्निशन सिस्टम
यह सिस्टम फेसबुक से फेक प्रोफाइल हटाने के लिए लाया गया था. लेकिन फेसबुक की रिब्रांड मेटा ने अपने बयान में कहा कि जिन लोगों ने फेस रिकग्निशन सिस्टम को अपनाया है, वे अब फोटो और वीडियो में ऑटोमैटिकली पहचाने नहीं जाएंगे, क्योंकि हम एक अरब से ज्यादा लोगों के चेहरे की पहचान के टेम्प्लेट हटा देंगे.
हटाए जाएंगे एक अरब से भी ज्यादा लोगों के फेस प्रिंट
फेसबुक की नई पैरेंट कंपनी 'मेटा (Meta)' के वाइस प्रेसिडेंट जेरोम पेसेंटी (Jerome Pesenti) ने अपने ब्लाग पोस्ट में कहा, 'यह बदलाव टेक्नोलाजी के इतिहास में फेस रिकग्निशन के इस्तेमाल को लेकर बड़ा और अहम बदलाव का प्रतिनिधित्व करेगा.' पेसेंटी ने पोस्ट में कहा है कि फेसबुक के एक्टिव यूजर्स में से एक तिहाई से ज्यादा लोगों ने हमारी चेहरा पहचानने की सेटिंग को अपनाया है और उनका पहचान भी होती आई है.
इसे हटाने का मतलब होगा कि एक अरब से भी ज्यादा लोगों के चेहरा पहचानने के टेंपलेट को डिलीट किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कंपनी लोगों की बढ़ रही चिंताओं के बीच तकनीक के पॉजिटिव इस्तेमाल को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है. लगतार बढ़ रही परेशानी के मद्देनज़र एक सख्त कानून बनाने की भी जरूरत है.
साल 2019 में हटाया था टैग वाला फीचर
इससे पहले फेसबुक ने अपना नाम बदलने का ऐलान किया था, कंपनी ने कहा था कि वह अपना नाम बदलकर मेटा रख रही है. 2019 में कंपनी ने फेस रिकग्निशन साफ्टवेयर के इस्तेमाल से टैग का आप्शन हटाया था. फेसबुक ने टैग वाले फीचर में इलिनोइस के खिलाफ एक केस भी दर्ज कराया था.