
कई किसान पारंपरिक खेती छोड़कर फलों की खेती कर रहे हैं और अच्छा-खासा मुनाफा कमा रहे हैं. महाराष्ट्र के बीड जिले में एक ऐसे ही किसान हैं, जिनका नाम परमेश्वर थोराट है. ये किसान सूखाग्रस्त इलाके में एवोकाडो की खेती कर रहे हैं. इससे वो लाखों की कमाई कर रहे हैं. हालांकि उनके लिए ये काम आसान नहीं था. उनको कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन हार नहीं मानी और सफलता हासिल की.
कैसे आया एवोकाडो की खेती का आइडिया?
परमेश्वर थोराट साल 2018 से एवोकाडो की खेती कर रहे हैं. उनको ये आइडिया तब आया, जब वो किसी काम से बेंगलुरु गए थे, वहां थोराट ने एवोकाडो की अर्का सुप्रीम किस्म की खेती देखी. इसके बाद थोराट ने इसके बारे में जानकारी हासिल तो पाया कि इसे बीड के सूखाग्रस्त इलाके में भी उगाया जा सकता है. फिर उन्होंने फैसला कर लिया कि अपने गांव में वो एवोकाडो की खेती करेंगे. आपको बता दें कि एवोकाडो की अर्का सुप्रीम किस्म को 45 डिग्री सेल्सियम तक के तापमान में उगाया जा सकता है.
सबसे पहले मिट्टी को बनाया उपजाऊ-
किसान परमेश्वर थोराट के लिए एवोकाडो की खेती करना आसान नहीं था. इसके लिए उनको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. सबसे बड़ी समस्या तो खेती के लिए गुणवत्तापूर्ण मिट्टी और पानी की कमी थी. हालांकि परमेश्वर ने हार नहीं मानी और एवोकाडो की खेती के लिए पूरी तरह से जुट गए.
सबसे पहले थोराट ने 0.75 एकड़ में कई गड्ढे खोदवाए. इन गड्ढों का आकार 2 बाई 2 फीट था. इन गड्डों में गोबर का खाद भर दिया. इससे मिट्टी काफी उपजाऊ हो गई. मिट्टी उपजाऊ होने के बाद दूसरी चुनौती पानी की कमी थी. पानी की कमी को दूर करने के लिए किसान ने ड्रिप सिंचाई सिस्टम को अपनाया. इस विधि में पानी सीधे पौधों की जड़ों में जाता है और पानी बर्बादी भी नहीं होता है. इतना ही नहीं, थोराट ने अपने खेत में एक तालाब बनवाया, ताकि उसमें बारिश का पानी इकट्ठा किया जा सके. इस पानी का इस्तेमाल उस समय करते हैं, जब सबसे भीषण गर्मी का वक्त होता है.
जैविक खाद का इस्तेमाल-
परमेश्वर थोराट ने शुरुआत में एवोकाडो के पौधों में रासायनिक खाद का इस्तेमाल किया. लेकिन जब उनको जैविक खाद के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने इसे अपनाना बेहतर समझा. उसके बाद से वो हमेशा गोबर की खाद का इस्तेमाल करते हैं. इससे पौधे बेहतर होते हैं और एवोकाडो खाने वाले की सेहत भी अच्छी रहती है. मार्केट में जैविक उत्पादों की डिमांड भी ज्यादा है.
थोराट ने पौधों की उम्र और उपज बढ़ाने के लिए ग्राफ्टिंग भी की. इसमें एक पौधे की जड़ों को दूसरे पौधे के तने के साथ मिलाया जाता है. इसका फायदा भी खेती में हुआ.
सालाना 10 लाख रुपए की कमाई-
एवोकाडो के पेड़ तैयार होने में 3 से 4 साल का वक्त लगता है. जबकि ग्राफ्टेड पेड़ों को फलने में 4-5 साल लग सकते हैं. परमेश्वर थोराट को पहली फसल के लिए 3 साल का इंतजार करना पड़ा. साल 2021 में उपज ज्यादा नहीं थी. लेकिन अगले साल 50 पेड़ों से फल मिलने लगे. इसके बाद थोराट के अच्छे दिन आ गए. साल 2023 में उनको 1200 किलो से अधिक एवोकाडो के फल मिले. इस खेती से थोराट को एक एकड़ में एक साल में 10 लाख रुपए की कमाई होती है.
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