
रतन टाटा एक ऐसा नाम जो सिर्फ बिजनेस की दुनिया तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में भी राज करता है. टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन ने अपने जीवनकाल में अनेकों बिजनेस साम्राज्य खड़े किए, लेकिन उनके जीवन की सादगी और मानवीय मूल्यों ने उन्हें सबसे अलग बनाया. अक्टूबर 2024 में उनके निधन के बाद, उनकी आखिरी वसीयत (Last Will and Testament) ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक उद्योगपति नहीं, बल्कि एक सच्चे इंसान थे.
करोड़ों की संपत्ति, लेकिन सिर्फ एक नोकिया फोन!
रतन टाटा की संपत्ति का मूल्य सैकड़ों करोड़ रुपये में था, लेकिन उनके पास केवल एक साधारण नोकिया फोन था. उनकी घड़ियों का कलेक्शन भी काफी चर्चित था- जिसमें दुनिया की मशहूर ब्रांड्स के अलावा, टाटा ग्रुप की 'Titan' और 'Taj Mahal Palace Watch' भी शामिल थीं. उनके पास कई बेशकीमती प्रॉपर्टी और इन्वेस्टमेंट थे, लेकिन उन्होंने अपनी वसीयत में सब कुछ दान करने का फैसला लिया.
रतन टाटा की आखिरी वसीयत
रतन टाटा ने अपने जीवनकाल में दो बार अपनी वसीयत बदली थी-पहली बार 1996 में और दूसरी बार 2009 में. लेकिन 23 फरवरी 2022 को लिखी गई उनकी अंतिम वसीयत में उन्होंने अपने परिवार के साथ-साथ समाज के जरूरतमंद लोगों का भी ध्यान रखा.
1. टाटा संस के शेयर
रतन टाटा ने अपनी वसीयत में साफ कर दिया कि उनके पास मौजूद टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड के शेयर कभी भी बेचे या ट्रांसफर नहीं किए जाएंगे. ये शेयर "रतन टाटा फाउंडेशन" नामक सेक्शन 8 कंपनी के अधीन रहेंगे, जिससे इनकी आय केवल समाज सेवा के कार्यों में ही खर्च की जाएगी.
उनकी वसीयत के अनुसार, इन शेयरों से होने वाली आय का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाएगा-
2. नौकर, ड्राइवर और पार्ट-टाइम हेल्पर्स को भी मिला हिस्सा!
रतन टाटा अपने कर्मचारियों के लिए कितने संवेदनशील थे, यह उनकी वसीयत से साफ झलकता है. उन्होंने ड्राइवरों, घरेलू नौकरों, पार्ट-टाइम क्लीनर्स और अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक खास व्यवस्था की.
उनकी वसीयत के अनुसार-
रतन टाटा ने न केवल अपने वर्तमान कर्मचारियों का ख्याल रखा, बल्कि उन दो चपरासियों के लिए भी ₹50,000-₹50,000 की राशि छोड़ी जो अब उनके कर्मचारी नहीं थे.
3. जानवरों के लिए भी टाटा का बड़ा दिल!
रतन टाटा हमेशा से जानवरों के प्रति संवेदनशील रहे हैं. उनकी वसीयत में पालतू जानवरों के लिए भी खास प्रावधान किया गया.
4. बहनों और परिवार के लिए क्या छोड़ा?
रतन टाटा की वसीयत के मुताबिक-
5. अलीबाग और जुहू की प्रॉपर्टी का क्या हुआ?
6. उनकी यादगार चीजें कैसे बांटी जाएंगी?
7. लाइसेंसी हथियारों का क्या हुआ?
रतन टाटा के पास तीन लाइसेंसी हथियार थे
इन सभी हथियारों को उन्होंने अपने दोस्त मेहली मिस्त्री को सौंपने का फैसला किया. अगर मेहली इन्हें स्वीकार नहीं करते, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत इन्हें बेचकर प्राप्त धनराशि चैरिटी में दान कर दी जाती.
8. रतन टाटा की आखिरी इच्छा!
रतन टाटा ने अपनी वसीयत में स्पष्ट रूप से लिखा कि, "मेरे निधन के बाद, मेरी चिता की राख को मुंबई के समुद्र में बहा दिया जाए, क्योंकि मैंने इस शहर से बेहद प्यार किया है."