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Ratan Tata Last Will: रतन टाटा का आखिरी वसीयतनामा! नौकरों से लेकर ड्राइवरों और पालतू कुत्तों तक को किया अपनी संपत्ति में शामिल

रतन टाटा ने अपने जीवनकाल में दो बार अपनी वसीयत बदली थी-पहली बार 1996 में और दूसरी बार 2009 में. लेकिन 23 फरवरी 2022 को लिखी गई उनकी अंतिम वसीयत में उन्होंने अपने परिवार के साथ-साथ समाज के जरूरतमंद लोगों का भी ध्यान रखा. रतन टाटा ने अपनी वसीयत में लिखा कि, "मेरे निधन के बाद, मेरी चिता की राख को मुंबई के समुद्र में बहा दिया जाए, क्योंकि मैंने इस शहर से बेहद प्यार किया है."

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रतन टाटा एक ऐसा नाम जो सिर्फ बिजनेस की दुनिया तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में भी राज करता है. टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन ने अपने जीवनकाल में अनेकों बिजनेस साम्राज्य खड़े किए, लेकिन उनके जीवन की सादगी और मानवीय मूल्यों ने उन्हें सबसे अलग बनाया. अक्टूबर 2024 में उनके निधन के बाद, उनकी आखिरी वसीयत (Last Will and Testament) ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक उद्योगपति नहीं, बल्कि एक सच्चे इंसान थे.

करोड़ों की संपत्ति, लेकिन सिर्फ एक नोकिया फोन!
रतन टाटा की संपत्ति का मूल्य सैकड़ों करोड़ रुपये में था, लेकिन उनके पास केवल एक साधारण नोकिया फोन था. उनकी घड़ियों का कलेक्शन भी काफी चर्चित था- जिसमें दुनिया की मशहूर ब्रांड्स के अलावा, टाटा ग्रुप की 'Titan' और 'Taj Mahal Palace Watch' भी शामिल थीं. उनके पास कई बेशकीमती प्रॉपर्टी और इन्वेस्टमेंट थे, लेकिन उन्होंने अपनी वसीयत में सब कुछ दान करने का फैसला लिया.

रतन टाटा की आखिरी वसीयत 
रतन टाटा ने अपने जीवनकाल में दो बार अपनी वसीयत बदली थी-पहली बार 1996 में और दूसरी बार 2009 में. लेकिन 23 फरवरी 2022 को लिखी गई उनकी अंतिम वसीयत में उन्होंने अपने परिवार के साथ-साथ समाज के जरूरतमंद लोगों का भी ध्यान रखा.

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1. टाटा संस के शेयर
रतन टाटा ने अपनी वसीयत में साफ कर दिया कि उनके पास मौजूद टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड के शेयर कभी भी बेचे या ट्रांसफर नहीं किए जाएंगे. ये शेयर "रतन टाटा फाउंडेशन" नामक सेक्शन 8 कंपनी के अधीन रहेंगे, जिससे इनकी आय केवल समाज सेवा के कार्यों में ही खर्च की जाएगी.
उनकी वसीयत के अनुसार, इन शेयरों से होने वाली आय का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाएगा-

  • गरीब और अनाथ बच्चों की शिक्षा
  • छात्रवृत्तियों के जरिए जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद
  • वृद्धाश्रम और अनाथालयों को सहयोग
  • गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों की आर्थिक सहायता
  • सड़क पर आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों की देखभाल के लिए दान

2. नौकर, ड्राइवर और पार्ट-टाइम हेल्पर्स को भी मिला हिस्सा!
रतन टाटा अपने कर्मचारियों के लिए कितने संवेदनशील थे, यह उनकी वसीयत से साफ झलकता है. उन्होंने ड्राइवरों, घरेलू नौकरों, पार्ट-टाइम क्लीनर्स और अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक खास व्यवस्था की.
उनकी वसीयत के अनुसार-

  • तीन घरेलू नौकरों के कर्ज को माफ कर दिया गया.
  • सात साल से अधिक समय तक काम करने वाले नौकरों को ₹15 लाख तक की राशि दी जाएगी.
  • ड्राइवरों और अन्य कर्मचारियों को ₹2 लाख तक की राशि मिलेगी, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को अधिकतम ₹50,000 तक मिल सकता है.
  • हाउसकीपर और उनके परिवार को ₹40 लाख, दूसरे हाउसकीपर को ₹20 लाख और उनके ड्राइवर को ₹1.50 लाख दिए जाएंगे.
  • अलीबाग स्थित उनके बंगले के हाउसकीपर को भी ₹2 लाख दिए जाएंगे.

रतन टाटा ने न केवल अपने वर्तमान कर्मचारियों का ख्याल रखा, बल्कि उन दो चपरासियों के लिए भी ₹50,000-₹50,000 की राशि छोड़ी जो अब उनके कर्मचारी नहीं थे.

3. जानवरों के लिए भी टाटा का बड़ा दिल!
रतन टाटा हमेशा से जानवरों के प्रति संवेदनशील रहे हैं. उनकी वसीयत में पालतू जानवरों के लिए भी खास प्रावधान किया गया.

  • अगर उनके निधन के समय कोई पालतू जानवर जीवित होता, तो उसकी देखभाल के लिए ₹12 लाख अलग रखे जाते.
  • प्रत्येक पालतू जानवर के लिए ₹30,000 प्रति तिमाही की राशि दी जाती.
  • अगर जानवरों की मृत्यु हो जाती, तो शेष धनराशि चैरिटी को दान कर दी जाती.

4. बहनों और परिवार के लिए क्या छोड़ा?
रतन टाटा की वसीयत के मुताबिक-

  • उनकी शेयर संपत्ति का एक-तिहाई हिस्सा उनकी तीन बहनों- शिरीन जेजीभॉय, दीआना जेजीभॉय और मोहिनी दत्ता को दिया जाएगा.
  • अगर कोई बहन उनकी मृत्यु से पहले ही दुनिया छोड़ चुकी होती, तो उसकी संपत्ति उनके बच्चों को दी जाती.
  • उनका गहनों और चांदी के सामान का संग्रह उनके भाई जिमी नवल टाटा और उनकी बहनों को दिया जाएगा.

5. अलीबाग और जुहू की प्रॉपर्टी का क्या हुआ?

  • जुहू स्थित बंगले का चौथाई हिस्सा उनके भाई जिमी नवल टाटा को दिया गया.
  • अलीबाग का बंगला उनके करीबी दोस्त मेहली मिस्त्री को सौंपा गया, क्योंकि मेहली ने यह प्रॉपर्टी खरीदने में अहम भूमिका निभाई थी.

6. उनकी यादगार चीजें कैसे बांटी जाएंगी?

  • उनके सभी घरेलू सामान (टीवी, एसी, कंप्यूटर, क्रिस्टल पीस) बेच दिए जाएंगे और उससे मिलने वाली राशि उनकी बहनों में बांटी जाएगी.
  • पुस्तकें या तो उनकी बहनों को दी जाएंगी या किसी लाइब्रेरी को दान कर दी जाएंगी.
  • गाड़ियों, पेंटिंग्स और अन्य कलाकृतियों को बाजार में बेचा जाएगा और उसकी कमाई चैरिटी में दी जाएगी.
  • कपड़े किसी एनजीओ को गरीबों में बांटने के लिए दिए जाएंगे.
  • उनकी घड़ियां, पेन, कफलिंक और मोबाइल फोन उनकी वसीयत में दर्ज नामों को दिए जाएंगे.

7. लाइसेंसी हथियारों का क्या हुआ?
रतन टाटा के पास तीन लाइसेंसी हथियार थे

  • Colt 25 Bore Pistol
  • 12 Bore DBBL Gun
  • 22 Pistol Hi Standard

इन सभी हथियारों को उन्होंने अपने दोस्त मेहली मिस्त्री को सौंपने का फैसला किया. अगर मेहली इन्हें स्वीकार नहीं करते, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत इन्हें बेचकर प्राप्त धनराशि चैरिटी में दान कर दी जाती.

8. रतन टाटा की आखिरी इच्छा!
रतन टाटा ने अपनी वसीयत में स्पष्ट रूप से लिखा कि, "मेरे निधन के बाद, मेरी चिता की राख को मुंबई के समुद्र में बहा दिया जाए, क्योंकि मैंने इस शहर से बेहद प्यार किया है."