
उत्तर प्रदेश के बहराइच के रहने वाले एक शख्स ने एमबीए की पढ़ाई की. उसके बाद मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब किया. 13 लाख का पैकेज था. फिर उसने बड़ा फैसला लिया और नौकरी छोड़ दी. गांव चला गया. खेती-किसानी करने लगा. उसके इस फैसले से हर कोई हैरान था. कोई कोस रहा था तो कोई पागल कह रहा था. लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी और अपने सपने को पूरा करने में जुट गया. पिछले 2 साल में अमित सिंह 60 लाख रुपए का बिजनेस कर चुके हैं. चलिए आपको कारपोरेट की नौकरी छोड़कर खेती में झंडा गाड़ने वाले अमित सिंह की कहानी बताते हैं.
घरवालों ने बोला- सिविल सर्विसेज की तैयारी करो
अमित सिंह उत्तर प्रदेश के बहराइच के रहने वाले हैं. उनके घर में पुलिस, सिविल सर्विसेज की तैयारी का माहौल था. घर में हर कोई चाहता था कि बेट बड़ा होकर सिविल सर्विसेज की तैयारी करे. जब अमित ने 12वीं पास किया तो घरवालों ने कहा कि सिविल सर्विस की तैयारी करो. इसके बाद अमित दिल्ली चले गए, लेकिन एक साल बाद वापस लौट आए. इसके बाद उन्होंने लखनऊ से ग्रेजुएशन किया और एमबीए की डिग्री हासिल की.
कोरोना काल में छोड़ दी लाखों की नौकरी-
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक एमबीए की डिग्री हासिल करने के बाद अमित सिंह की नौकरी एक मल्टीनेशनल कंपनी में लग गई. अमित ने 7 सालों तक नौकरी की. इस दौरान उन्होंने 3-4 कंपनियों में जॉब की. इस बीच कोरोना काल आ गया और अमित घर लौट आए. घर से ही कंपनी में काम करने लगे. इस दौरान उनकी मुलाकात गांव के महिला किसानों से हुई. इसके बाद अमित का मन बदल गया. एक दिन अमित ने घरवालों को बताया कि वो जॉब छोड़ रहे हैं. सब ने कहा कि नौकरी छोड़ दोंगे तो कैसे चलेगा?
अमित सिंह की शादी 2015 में हो गई थी. इसको लेकर भी घरवाले चिंतित हो गए. घरवालों ने कहा कि परिवार कैसे चलेगा? एमबीए करके खेती कौन करता है? उन्होंने कहा कि खेती भी कोई बिजनेस है. लेकिन अमित ने खेती को बिजनेस में बदलने का फैसला कर लिया था.
शिवा एग्रो नाम की कंपनी चलाते हैं अमित-
अमित सिंह ने किसानों से खेती के बारे में बहुत कुछ सीखा. इसके बाद उन्होंने टेक्निकल नॉलेज के लिए स्टेट एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट की मदद ली. शुरू में अमित ने किसानों को फ्री में बीज देना शुरू किया. एक-दो साल तक बिना किसी फायदे के काम किया. अमित सिंह ने साल 2022-23 में 'शिवा एग्रो' नाम की कंपनी बनाई थी. उनके फार्म में 20 एकड़ में गेहूं, केला, पुदीना की फसल तैयार है. जबकि उन्होंने चंदन के पेड़ भी लगाए हैं. ये जमीन अमित से पिता ने खरीदी थी.
शुरुआत में अमित ने 5-10 महिलाओं के साथ मिलकर खेती करना शुरू किया. वो काला नमक धान की खेती पर जोर देते थे. धीरे-धीरे अमित महिला किसानों के साथ मिलकर ऑर्गेनिक तरीके से चावल, गेहूं, हल्दी उपजाने लगे. जब उनका काम चल निकला तो घरवालों का सपोर्ट भी मिलने लगा.
मशरूम भी उगाते हैं अमित-
अमित सिंह मशरूम की फार्मिंग भी करते हैं. इसके लिए 15 लाख की मशीन लगाई है. इसकी क्षमता 15 टन है. यह मशीन कचरे से चलती है. वो प्रोडक्ट की पैकेजिंग भी करते हैं और उसे दिल्ली, लखनऊ और उत्तराखंड में बेचते हैं. वो ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए भी सेल कर रहे हैं. अभी अमित सिंह के साथ 900 किसान जुड़े हैं.
सिर्फ चावल से सालाना 20-25 लाख रुपए का बिजनेस हो रहा है. अमित का प्लान अगले कुछ सालों में गोट फार्मिंग और फिशिंग पर भी काम करना है. अमित के फार्म हाउस में चंदन के पेड़ भी लगे हैं. 15 साल बाद इनकी कीमत 20 लाख रुपए होगी.
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