scorecardresearch

Difference Between Tax and Tariff: टैक्स और टैरिफ में क्या होता है मुख्य अंतर? दोनों को लागू करने का क्या है मकसद

टैरिफ और टैक्स में मुख्य अंतर उसको लागू करने के मकसद को लेकर है. टैक्स को सरकार चलाने और लोगों की बुनियादी सुविधाओं को पूरा करने के लिए लगाया जाता है. जबकि टैरिफ का मकसद स्थानीय उद्योगों को बचाना और बढ़ावा देना है. इसका मकसद कारोबार में संतुलन बनाए रखना है.

Difference Between Tax and Tariff Difference Between Tax and Tariff

अमेरिका ने भारत पर भी 26 फीसदी टैरिफ लगाया है. इसके बाद भारत के कारोबारियों का अमेरिका में बिजनेस करना थोड़ा मुश्किल होगा. अमेरिका कई देशों पर टैरिफ लगाया है. दुनियाभर में अमेरिका के टैरिफ की चर्चा हो रही है. अब लोग ये चर्चा कर रहे हैं कि टैरिफ और टैक्स में क्या अंतर है? क्या टैरिफ भी टैक्स जैसा ही है? टैरिफ और टैक्स में मुख्य अंतर क्या है? चलिए आपको टैक्स और टैरिफ को लेकर उठ रहे इन तमाम सवालों के जवाब बताते हैं.

टैक्स और टैरिफ में अंतर-
टैक्स और टैरिफ में मुख्य अंतर उसे लागू करने का क्षेत्र और उसके मकसद को लेकर होता है. दोनों से सरकार को राजस्व मिलता है. लेकिन इसका इस्तेमाल अलग-अलग होता है.

टैक्स एक अनिवार्य वित्तीय शुल्क है. इसे सरकार अपने देश में नागरिकों, व्यवसाय और प्रॉपर्टी पर लगाती है. इससे मिलने वाले पैसे से सरकार लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करती है. 

सम्बंधित ख़बरें

जबकि टैरिफ को इंपोर्ट और एक्सपोर्ट होने वाले सामानों पर लगाया जाता है. इसे घरेलू कारोबार को संरक्षण देने और इंटरनेशनल कारोबार को कंट्रोल करने के लिए टैरिफ लगाया जाता है.

क्या है मकसद-
टैक्स लगाने का मकसद सरकार चलाने और लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना है. इससे मिलने वाले पैसों से आर्थिक नीतियों को लागू करना होता है. जबकि टैरिफ का मकसद स्थानीय कारोबार को संरक्षण देना और उसको बढ़ावा देना है. व्यापार संतुलन बनाए रखना है.

कहां होता है लागू-
टैक्स को सरकार अपने देश में लागू करती है. टैक्स नागरिकों और संस्थाओं से वसूला जाता है. जबकि टैरिफ सीमा शुल्क के तौर पर लागू होता है. इसे इंटरनेशनल कारोबार पर लागू किया जाता है. इसे दूसरे देशों से होने वाले व्यापार पर लागू किया जाता है.

टैक्स एक सामान्य कर है. इसका असर सभी क्षेत्रों पर होता है. जबकि टैरिफ विशेष होता है, इसे देश की सीमा से बाहर जाने और आने वाले सामानों पर लगाया जाता है. इनकम टैक्स और जीएसटी टैक्स के दायरे में आएंगे. जबकि विदेश से आने वाले मोबाइल फोन पर लगाने वाला कस्टम ड्यूटी टैरिफ के तहत आता है.

ये भी पढ़ें: