
सिविक वॉलिंटियर का नाम सुनते ही सबसे पहले कोलकाता रेप केस (Kolkata Rape Case) जेहन में आएगा. दरअसल, कोलकाता के आरजी कर (RG Kar Medical College) मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में महिला डॉक्टर के रेप-मर्डर का अपराधी एक सिविक पुलिस वॉलिंटियर था.
कोलकाता रेप केस ने सिविक वॉलिंटियर का नाम खराब कर दिया है लेकिन कई सिविक वॉलिंटियर्स ऐसे हैं जो अपने काम से लोगों का दिल जीत रहे हैं. कुछ ऐसा ही काम हुगली के एक ट्रैफिक सिविक वॉलिंटियर कर रहे हैं.
हीरालाल सरकार एक ट्रैफिक सिविक वॉलिंटियर हैं. वो हुगली के बालागढ़ में तैनात हैं. सिविक वॉलिंटियर हीरालाल सकार अपनी ड्यूटी के साथ-साथ गरीब आदिवासी बच्चों को फ्री में पढ़ा रहे हैं.
ड्यूटी के बाद ट्यूशन
हुगली में सिविक वॉलिंटियर में तैनात हीरालाल सरकार ने गरीब बच्चों के भविष्य को संवारने का बीड़ा उठाया है. हीरालाल सरकार एसटीटीके रोड पर ट्रैफिक की ड्यूटी करते हैं. अपने काम से थोड़ा समय निकालकर गरीब बच्चों को पढ़ाते हैं. हीरा लाल गरीब बच्चों को इतिहास, भूगोल और साहित्य लेकर सभी विषय पढ़ाते हैं.
हीरालाल सरकार के पास गरीब बच्चे पढ़ने आते हैं. जिन बच्चों के माता-पिता गरीबी की वजह से नहीं पढ़ा पाते हैं, वे सिविक वॉलिंटियर हीरालाल सरकार के पास ट्यूशन पढ़ने आते हैं. हीरालाल के इस प्रयास की तारीफ हर तरफ हो रही है. हीरालाल को सिविक वॉलिंटियर विभाग के पदाधिकारियों ने सम्मानित भी किया है.
गरीब बच्चों को पढ़ाना ही लक्ष्य
अपने इस काम को लेकर सिविक वॉलिंटियर हीरालाल सरकार कहते हैं कि उनके इलाके के गरीब आदिवासी बच्चों के परिवार के पास इतना सामर्थ नहीं है कि वो प्राइवेट ट्यूशन रख सकें. सरकारी स्कूल के पढ़ाई से उनकी अच्छी शिक्षा की जरूरत पूरी नहीं होती इसलिए उन्होंने तय किया है कि अपने ड्यूटी के बाद के समय को हुए इन बच्चों के लिए समर्पित करेंगे.
हीरा लाल सरकार ने बताया कि अपने इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने मेहनत शुरू कर दी है. अब बच्चों को पढ़ाना ही उनके जीवन का लक्ष्य बन गया है. हुगली के सिविक वॉलिंटियर हीरालाल को अपने इस काम पर गर्व और इसको आगे जारी रखना चाहते हैं.
क्या होते हैं सिविक वॉलिंटियर?
सिविक वॉलिंटियर्स की नियुक्ति साल 2011 में ममता बनर्जी ने की थी. उस समय पुलिस के रोजमर्रा के काम के लिए मैन पावर की कमी थी. तब पुलिस और ट्रैफिक के छोटे-मोटे काम को पूरा करने के लिए आम लोगों को सिविक वॉलिंटियर्स के रूप में शामिल किया था.
सिविक वॉलिंटियर्स नीली वर्दी पहनते हैं. शुरू में इनको हरी वर्दी दी गई है. सिविक वॉलिंटियर्स की नियुक्ति कॉन्ट्रैक्ट पर होती है. सिविक वॉलिंटियर्स को महीने में कुछ पैसे दिए जाते हैं. साथ ही साल में एक बार बोनस भी दिया जाता है.
(भोलानाथ साहा की रिपोर्ट)