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मेंटल हेल्थ के लिए अच्छा हो सकता है बुरे सपनों का आना, पहले ही जान सकते हैं डिमेंशिया के खतरे के बारे में 

हाल ही में हुई एक रिसर्च में सामने आया है कि हम बाद में होने वाले डिमेंशिया के खतरे को पहले ही जान सकते हैं. ये रिसर्च लैंसेट जर्नल में पब्लिश हुई है. इसमें 3 हजार से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया.

Dementia Dementia
हाइलाइट्स
  • ये रिपोर्ट लेैंसेट जर्नल में पब्लिश हुई है

  • बुरे सपनों से भांप सकते हैं डिमेंशिया का खतरा 

हम अपनी जिंदगी का करीब एक-तिहाई हिस्सा सोने में बिताते हैं. इसमें से ज्यादातर हिस्सा वो होता है जिसमें हम सपने देखते हैं. नई रिसर्च के मुताबिक, जो इंसान 2022 में करीब 73 साल का है उसने अपनी जिंदगी के 6 साल सोकर सपने देखने में बिताए हैं. इन सपनों का हमारी जिंदगी में अहम रोल होता है. हालांकि, सपनों के बारे में काफी कुछ हमें नहीं पता है. लेकिन कई सारी रिसर्च बताती हैं कि ये हमारी हेल्थ के लिए काफी अच्छे होते हैं. 

लैंसेट जर्नल में पब्लिश हुई नई रिपोर्ट के मुताबिक, सपने हमारी मेंटल हेल्थ के बारे में काफी कुछ बता सकते हैं. विशेष रूप से बुरे सपने भविष्य में होने वाली भूलने की बीमारी जिसे हम डिमेंशिया भी कहते हैं, से जोड़कर देखे जा सकते हैं. 

बुरे सपनों से भांप सकते हैं डिमेंशिया का खतरा 

बार-बार आ रहे बुरे सपनों की वजह से आप बाद में होने वाले डिमेंशिया के खतरे को भांप सकते हैं. इस रिसर्च में तीन बड़े अमेरिकी अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था. इनमें 35 से 64 साल की उम्र के 600 से अधिक लोग और 79 और उससे अधिक उम्र के 2,600 लोग शामिल किए गए थे. 

इन सभी प्रतिभागियों को शुरुआत में डेमेंशिया नहीं था. 2002 से 2012 के बीच में की गई शुरुआती रिसर्च में प्रतिभागियों को एक प्रश्नावली दी जिसमें पूछा गया कि उन्हें कितनी बार बुरे सपने आते हैं.

क्या आया रिसर्च में सामने?

जिन वृद्ध पुरुषों को हर हफ्ते बुरे सपने आते थे उनमें डिमेंशिया विकसित होने की संभावना उन वृद्ध पुरुषों की तुलना में पांच गुना अधिक थी, जिन्होंने कोई बुरे सपने नहीं आते थे. हालांकि, महिलाओं में जोखिम में वृद्धि केवल 41 प्रतिशत थी. मध्यम आयु वर्ग में एक समान पैटर्न पाया गया. इस रिसर्च में आखिर में सामने आया कि बार-बार बुरे सपने आना डिमेंशिया के शुरुआती लक्षणों में से एक हो सकता है. ये खतरा खासकर पुरुषों में ज्यादा होता है.

हालांकि, रिसर्च में ये भी कहा गया है कि बुरे सपनों का आना उपचार योग्य है यानि ये ट्रीटेबल है. और बुरे सपनों के लिए फर्स्ट लाइन मेडिकल ट्रीटमेंट पहले से ही अल्जाइमर रोग से जुड़े असामान्य प्रोटीन के बनने को कम करने के लिए दिखाया गया है. रिसर्च के मुताबिक, बुरे सपनों के इलाज के बाद मेमोरी और थिंकिंग स्किल में काफी सुधार भी देखने को मिला है.