
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ा बदलाव किया है. दो राज्यों बिहार (Bihar) और राजस्थान (Rajasthan) के प्रदेश अध्यक्ष को बदल दिया है. इतना ही नहीं छह राज्यों में प्रभारी बदले गए हैं.पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के निर्देश पर बीजेपी के मुख्यालय प्रभारी और राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने इस संबंध में मनोनयन पत्र जारी किया है.
बिहार में डॉ. दिलीप जायसवाल (Dr.Dilip Jaiswal) को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. अभी तक यह जिम्मेदारी डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) संभाल रहे थे. बीजेपी ने राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष राज्यसभा सांसद मदन राठौर को बनाया है. इससे पहले लोकसभा सांसद सीपी जोशी राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष पद पर थे.
इनको भी मिली बड़ी जिम्मेदारी
भारतीय जनता पार्टी ने नेशनल सेक्रेटरी अरविंद मेनन को तमिलनाडु का प्रभारी और सुधाकर रेड्डी को सह प्रभारी नियुक्त किया है. राजस्थान में राज्यसभा सदस्य डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल को प्रभारी और विजया रहाटकर को सह प्रभारी नियुक्त किया है. सांसद राजदीप रॉय को त्रिपुरा, पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को असम, अतुल गर्ग को चंडीगढ़ और अरविंद मेनन को लक्षद्वीप का प्रभारी बनाया गया है.
कौन हैं दिलीप जायसवाल
बिहार के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए गए डॉ. दिलीप जायसवाल वर्तमान में राज्य सरकार में भूमि एवं राजस्व मंत्री हैं. वह तीसरी बार विधान परिषद के सदस्य चुने गए हैं. साल 2009 में पहली बार एमएलसी चुने गए दिलीप जायसवाल खगड़िया जिले से आते हैं. दिलीप जायसवाल 21 वर्षों से बिहार बीजेपी के कोषाध्यक्ष भी हैं.
दिलीप जायसवाल वैश्य जाति में कलवार समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. उनकी सीमांचल क्षेत्र में अच्छी पकड़ है. दिलीप जायसवाल की केंद्रीय नेतृत्व से भी खासी नजदीकियां हैं. उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भी करीबी माना जाता है. दिलीप जायसवाल ने प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर राष्ट्रीय नेतृत्व को धन्यवाद दिया है.
आखिर क्यों हटाए गए सम्राट चौधरी
सम्राट चौधरी को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी से हटाए जाने के बाद बिहार में सियासत गर्म हो गई है.विपक्षी पार्टियां भी तंज कस रही हैं. सवाल उठाया जा रहा है कि बीजेपी अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्षों का होता है तो फिर एक साल में ही सम्राट चौधरी से यह पद क्यों छिन लिया गया. आपको मालूम हो कि सम्राट चौधरी 23 मार्च 2023 को बिहार भाजपा का दायित्व पार्टी हाईकमान ने सौंपा था. उस समय सम्राट चौधरी विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष थे.
संजय जायसवाल के बाद सम्राट चौधरी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. अभी वह भाजपा विधानमंडल दल के नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं. सम्राट चौधरी को हटाए जाने का कारण राजनीतिक जानकार यह बता रहे हैं कि सम्राट को हटना ही था क्योंकि बीजेपी में कोई व्यक्ति दो पदों पर नहीं रह सकता. यह एक रूटीन प्रक्रिया है. हालांकि अंदर खाने बात कुछ और ही है.
...तो यह है हटाए जाने का मुख्य कारण
आपको मालूम हो कि सम्राट चौधरी पहले राजद में थे. इसके बाद वह जदयू में चले गए थे. फिर उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था. बीजेपी में उन्हें उम्मीद से बढ़कर मिला. वह डिप्टी सीएम पद तक पहुंच गए. सम्राट चौधरी कुशवाहा जाति से संबंध रखते हैं. बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी भी उन्हें इसी जाति को ध्यान में रखकर दिया था. बीजेपी का मानना था कि सम्राट चौधरी चुनाव में कुशवाहा और कोइरी वोट बैंक को पार्टी के पक्ष में कर पाएंगे लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 में ऐसा नहीं दिखा.
कुशवाहा वोट बैंक में विपक्ष की सेंधमारी से बीजेपी को उम्मीद के मुताबिक जीत नहीं मिली. वह 17 में से सिर्फ 12 संसदीय सीट ही जीत सकी. जानकारों ने बीजेपी के इस खराब प्रदर्शन के पीछे कुशवाहा मतदाताओं का सम्राट चौधरी के साथ खड़ा नहीं रहना बताया. इस वोट बैंक का अधिकांश हिस्सा राजद की ओर शिफ्ट हो गया. सम्राट चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाए जाने का प्रमुख कारण लोकसभा चुनाव का नतीजा ही रहा है.
कुशवाहा जाति के कद्दावर नेता माने जाने वाले उपेंद्र कुशवाहा तक काराकाट से चुनाव हार गए. इसके अलावा भाजपा औरंगाबाद, सासाराम, बक्सर और आरा जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर भी जीत नहीं सकी. लोकसभा चुनाव 2019 में ये सभी सीटें बीजेपी के पास थीं. औरंगाबाद लोकसभा सीट से राजद के अभय कुशवाहा ने जीत दर्ज की और लोकसभा में राजद संसदीय दल के नेता बने. इस बार महागठबंधन से दो जबकि एनडीए से महज एक कुशवाहा सांसद सदन पहुंचे हैं.
लगातार चौथी बार पिछड़ा समुदाय के व्यक्ति को बिहार की कमान
बिहार में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है. माना जा रहा है कि बीजेपी ने अभी से राज्य के सबसे बड़े वर्ग को साधने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है. यही वजह है कि बीजेपी ने एक बार फिर अत्यंत पिछड़ा वर्ग के बड़े चेहरा माने जाने वाले दिलीप जायसवाल को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दांव लगाया है. इससे पहले सम्राट चौधरी, संजय जायसवाल और नित्यानंद राय भी पिछड़ा वर्ग से ही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाए गए थे. बिहार में सबसे ज्यादा 36 फीसदी अति पिछड़ा वर्ग से जुड़ी आबादी है.
भाजपा दिलीप जायसवाल के जरिए विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में अपने वैश्य वोट बैंक को मजबूत करना चाहती है. लोकसभा चुनाव के बाद ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही थी शायद सीएम नीतीश कुमार से अच्छे संबंध नहीं होने के कारण सम्राट चौधरी को डिप्टी सीएम के पद से हटा दिया जाए लेकिन पार्टी ने ऐसा नहीं किया. अब ऐसा लगता है कि बीजेपी ने राज्य में 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने के लिए पार्टी के भीतर बदलाव करना पसंद किया है. सीमांचल जहां बीजेपी काफी कमजोर है, वहां दिलीप जयसवाल बीजेपी का सबसे मजबूत चेहरा हैं.