

नंबर चाहे गाड़ी का हो चाहे मोबाइल का.. नंबर के लिए लोगों की दीवानगी किसी से छुपी नहीं. हर कोई चाहता है कि उसका नंबर खासकर गाड़ी का नंबर वीआईपी होना चाहिए. बात सिर्फ नंबर की नहीं होती बल्कि नंबर के जरिए लोग सोसाइटी में अपना जलवा भी जमाना चाहते हैं. जलवा जिंदाबाद रखने की कवायद नोएडा में इतनी बढ़ गई कि यहां गाड़ी के एक नंबर के लिए लगभग 10 लाख की बोली लग गई.
नंबर के लिए लगती है बिडिंग
नोएडा के ARTO डॉक्टर सियाराम वर्मा ने बताया कि गाड़ियों के नंबर अलॉटमेंट के लिए बिडिंग यानी कि बोली लगाने की प्रक्रिया शुरू की थी. बिडिंग में 0001 नंबर के लिए खूब बोलियां लगी. आखिर में 0001 नंबर 957000 रुपए का बिक गया. इसी तरह 0007 के लिए 6 लाख 35 हजार 500 रुपए की फाइनल बोली लगी. बीडिंग में 24 नंबरों पर बोली लगाई गई. इनमें- 0002 नंबर 1 लाख 1500 रुपए में बिका, 0009- 1 लाख 1 हजार में और 7000 नंबर 1 लाख 83 हजार रुपए में बिका.
4 नंबर बिके एक लाख से ज्यादा के
कुल 24 नंबर में चार नंबर 1 लाख से ज्यादा के बिके, जबकि पांच नंबरों के लिए 50 हजार से ज्यादा की बोली लगी.एआरटीओ डॉक्टर सियाराम वर्मा बताते हैं की हर साल वीआईपी नंबर की बिडिंग से हमें करोड़ों का राजस्व मिलता है पिछले साल भी वीआईपी नंबर की बिडिंग से 1 करोड़ 24 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ था.
सबसे 0001 से लेकर 0009
परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक गौतमबुद्ध नगर में 351 ऐसे नंबर हैं जिनकी हर सीरीज में बोली लगाई जाती है. 0001 से लेकर 0009 और डबल डिजिट के नंबर सबसे ज्यादा डिमांड में रहते हैं. वैसे भी एनसीआर के लोग अपने रुतबे का बेहद ख्याल रखते हैं और इसके लिए वो पैसे को पानी की तरह बहाने से भी संकोच नहीं करते हैं. हालांकि सरकार और अधिकारी दोनों इससे मिलने वाली रकम से खुश दिखाई पड़ते हैं.