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सीबीएसई बोर्ड लॉन्च करेगा पेरेंटिंग कैलेंडर, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच बढ़ेगा संवाद.. बच्चों का अच्छी तरह होगा विकास

सीबीएसई बच्चों के विकास के लिए आज पेरेंटिंग कैलेंडर 2025-26 को लॉन्च करेगा. इसको बोर्ड के यूट्यूब चैनल पर लॉन्च किया जाएगा.

Representative Image (Source: Meta.AI) Representative Image (Source: Meta.AI)

28 मार्च को CBSE अपनी तरफ से साल 2025-26 के लिए पेरेंटिंग कैलेंडर को लॉन्च करेगा. अबतक जहां केवल बच्चों के मां-बाप स्कूल के रिसेपशन तक ही सीमीत थे. अब वे अपने बच्चों के साथ उनकी क्लास में बैठ सकेंगे, यहां तक के उनके साथ खेल सकेंगे.

क्या होगा पेरेंटिंग कैलेंडर का फायदा?
पेरेंटिंग कैलेंडर की मदद से बच्चों के मां-आप उनके टीचर्स के साथ मिलकर एक ऐसा माहौल पैदा कर सकेंगे. जिसमें उनका बच्चा अपनी पूरी क्षमता के साथ खुद को विकसित कर सकें. उसका कौशन पूरी तरह निखर कर बाहर आ सके. साथ ही उसे एक ऐसा माहौल मिले जहां वह खुद को खुश पा सके.

किस समय देख सकेंगे कैलेंडर को
CBSE द्वारा इस पेरेंटिंग कैलेंडर को शुक्रवार 28 मार्च को लॉन्च किया जाना है. बता दें कि CBSE इसे अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर शाम 4 बजे लॉन्च करेगा. इसे लाइव स्ट्रीम किया जाएगा. इर दौरान अभिभावक कैलेंडर से जुड़ी सभी जानकारियों को जान सकेंगे. साथ ही यह भी पता लगेगा कि पेरेंटिंग कैलेंडर किस तरह उनकी मदद करेगा.

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क्या रोल होगा इस पेरेंटिंग कैलेंडर का?
इस पेरेंटिंग कैलेंडर का मुख्य रोल यही होगा कि अभिभावक अपने बच्चे के भावनात्मक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास को शेप देने में अहम भूमिका निभाते हैं. बोर्ड के अनुसार, जबकि स्कूल विकास के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करते हैं. लेकिन उन्हें घर वाला वह माहौल नहीं मिल पाता जो वह अपने माता-पिता के साथ रहकर पाते हैं.

क्या लक्ष्य है कैलेंडर का?
अभिभावक और शिक्षकों के बीच संबंध को बेहतर बनाना इसका एक मुख्य लक्ष्य है. ताकि दोनों पक्षों के बीच अच्छी तरह बातचीत हो सके. जिससे कि बच्चे का पूरी तरह से विकास हो सके. बोर्ड के अनुसार, यह पेरेंटिंग कैलेंडर माता-पिता और शिक्षकों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने का एक तरीका है.

शिक्षक और माता-पिता मिलकर छात्रों की शिक्षा और मानसिक विकास पर ध्यान देते हैं तो छात्रों का समग्र विकास बेहतर तरीके से हो सकता है. पेरेंटिंग कैलेंडर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें मां-बाप और टीचर्स की मीटिंग, एक-दूसरे को सलाह और स्कूल और मां-बाप के बीच तालमेल बिठाया जा सके.