

विकसित भारत की तरफ कदम बढ़ाते देश का सामाजिक ताना-बाना कितना मजबूत है? नागरिक शिष्टाचार, विविधता एवं भेदभाव, स्त्री पुरुष का नजरिया, सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मसलों पर हम कहां खड़े हैं? इन तमाम मुद्दों को लेकर देश की समझ को परखने के लिए इंडिया टुडे ग्रुप ने How India Lives और Kadence International के साथ मिलकर देश का पहला 'Gross Domestic Behaviour' (GDB) सर्वे किया.
21 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 98 जिलों में ये सर्वे किया गया. इस सर्वे में 9188 लोगों से उनके व्यवहार को लेकर सवाल किए गए. इन सवालों के आधार पर ये देखा गया कि किन राज्य के नागरिकों का व्यवहार सबसे अच्छा है. जबकि किस सूबे की हालत सबसे खराब है.
सबसे बेहतर, सबसे खराब सूबा कौन-
सार्वजनिक सुरक्षा, नागरिक शिष्टाचार, विविधता और भेदभाव, स्त्री पुरुष नजरिया के पैमाने पर सबसे बेहतर रैंकिंग केरल की रही. जबकि तमिलनाडु को दूसरा स्थान मिला. इस रैंकिंग में तीसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल को जगह मिली. चौथे नंबर पर महाराष्ट्र और 5वें नंबर पर ओडिशा राज्य है. इस रैंकिंग में सबसे नीचे उत्तर प्रदेश है. जबकि यूपी से ऊपर पंजाब और गुजरात हैं.
नागरिक शिष्टाचार में कौन अव्वल-
देश के अलग-अलग राज्यों में नागरिक व्यवहार के अनोखे पैटर्न सामने आए. नागरिक शिष्टाचार में तमिलनाडु ने पहला स्थान हासिल किया. जबकि पश्चिम बंगाल दूसरे और ओडिशा तीसरे नंबर रहे. दिल्ली को चौथा और केरल को 5वां स्थान मिला.
टैक्स बचाने के लिए बहुमत ने कैश लेनदेन को सही ठहराया-
देश में 52 फीसदी लोग टैक्स से बचने के लिए कैश में लेनदेन को सही ठहराते हैं. जबकि 61 फीसदी लोग काम के लिए घूस देने को भी तैयार हैं. देश में 69 फीसदी लोग घर में पुरुषों के फैसले का समर्थन करते हैं.
सर्वे में रैंकिंग 4 पैमानों पर की गई है. इसमें सिविल बिहेवियर, पब्लिक सेफ्टी, स्त्री पुरुष प्रवृत्तियां और विविधता और भेदभाव के पैमाने पर सर्वे किया गया. इन चारों पैमानों पर सर्वे के नतीजों ने अलग-अलग समाज की क्षेत्रीय विविधताएं देखने को मिली. एक तरफ प्रगतिशील केरल है, दूसरी तरफ परंपरा को ढोने वाला उत्तर प्रदेश है. हालांकि लोगों की सोच में सुधार की भावना देखने को मिली.
दूसरे धर्म के पड़ोसी से 70 फीसदी को दिक्कत नहीं-
सर्वे में सबसे बड़ा खुलासा विविधता और भेदभाव वाले मामले में हुआ है. अगर पड़ोसी दूसरे धर्म का है तो 70 फीसदी लोगों को इससे कोई दिक्कत नहीं है. जबकि 60 फीसदी लोग रोजगार के मौकों में धार्मिक भेदभाव का विरोध करते हैं. यह नतीजे उत्साह बढ़ाते हैं. 61 फीसदी लोग अंतर-धार्मिक शादी का विरोध करते हैं, जबकि 56 फीसदी लोग अंतर-जातीय विवाह के खिलाफ हैं.
डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता-
देश में 76 फीसदी लोग कैश की बजाय डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता देते हैं. इसमें दिल्ली सबसे आगे हैं. दिल्ली में 96 फीसदी लोग डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता देते हैं. देश में 93 फीसदी लोगों का मानना है कि बेटियों को बेटों के बराबर पढ़ाई का मौका मिलना चाहिए और 84 फीसदी लोग महिलाओं के नौकरी करे के समर्थन में है.
पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 86 फीसदी लोग सुरक्षित-
सर्वे के मुताबिक 86 फीसदी लोग सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षित महसूस करते हैं. लेकिन स्त्री पुरुष पुर्वाग्रह का डर रहता है. 84 फीसदी लोगों का कहना है कि वे हिंसक अपराध की रिपोर्ट थाने में दर्ज करेंगे.