
मुंबई की एक अदालत ने हाल ही में, एक 25 वर्षीय व्यवसायी को एक नाबालिग लड़की को "आइटम" कहने और उसका यौन उत्पीड़न करने के लिए दोषी ठहराया. विशेष न्यायाधीश एसजे अंसारी ने कहा कि "आइटम" शब्द महिलाओं को सेक्सुअली ऑब्जेक्टिफाई करता है और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 के तहत महिलाओं के सम्मान के खिलाफ अपराध है.
मिली डेढ साल की सजा
कोर्ट ने आरोपी को 1.5 साल जेल की सजा सुनाई है. कोर्ट के आदेश की ध्यान देने वाली मुख्य बातों की चर्चा करें तो कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने "आइटम" शब्द का उपयोग किया और यह आमतौर पर लड़कों द्वारा अपमानजनक तरीके से लड़कियों को संबोधित करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है क्योंकि यह उन्हें यौन रूप से ऑब्जेक्टिफाई करता है.
साथ ही, कोर्ट का कहना था कि इस तरह के अपराधों से सख्ती से निपटने की जरूरत है क्योंकि महिलाओं को उनके अनुचित व्यवहार से बचाने के लिए ऐसे रोडसाइड रोमियो को सबक सिखाने की जरूरत है.
मामला क्या है?
मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति पर 16 वर्षीय लड़की को छेड़ने और पीछा करने का आरोप लगाया गया था. जुलाई 2015 में, जब नाबालिग स्कूल से घर लौट रही थी, तो आरोपी, जो अपने दोस्तों के साथ गली में बैठा था, उसके पीछे आया, उसके बाल खींचे और कहा "क्या आइटम किधर जा रही हो?"
जब लड़की ने उसके व्यवहार पर आपत्ति जताई तो आरोपी ने उसे गालियां दीं. लड़की ने अपने पिता के साथ मिलकर साकीनाका पुलिस स्टेशन में घटना की शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस ने तब भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के साथ-साथ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत FIR दर्ज की थी.
आरोपी को डेढ़ साल के साधारण कारावास और 500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है, जिसके नहीं होने पर उसे 3 महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा.