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भारतीय भाइयों को मिला अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार, ‘जीरो वेस्ट इंडिया’ के लक्ष्य पर कर रहे हैं काम

दिल्ली के एक लैंडफिल (कचरा भराव क्षेत्र) के 2017 में ढहने और उसके अगले दिन शहर में प्रदूषण बढ़ने के बाद दोनों भाइयों को कचरा अलग करने और रीसाइकिलिंग प्रोजेक्ट ‘वन स्टेप ग्रीनर’ शुरू करने का विचार आया था.

अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार विजेता अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार विजेता

दो भारतीय भाइयों विहान और नव अग्रवाल को दिल्ली में वृक्षारोपण करने और अपशिष्ट एवं प्रदूषण को कम करने के मकसद से शुरू की गई परियोजना के लिए शनिवार को बच्चों के एक प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया. नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने नीदरलैंड के द हेग में आयोजित एक समारोह में 17 साल के विहान और 14 साल के नव को ‘अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार’ (International Children's Peace Prize) से सम्मानित किया. 

प्राइज जीतने के बाद विहान और नव ने कहा कि वे इस पुरस्कार और उन्हें मिली पहचान की मदद से भारत और अन्य देशों में भी अपने नेटवर्क को विस्तार देंगे. दिल्ली के एक लैंडफिल (कचरा भराव क्षेत्र) के 2017 में ढहने और उसके अगले दिन शहर में प्रदूषण बढ़ने के बाद भाइयों को कचरा अलग करने और रीसाइकिलिंग प्रोजेक्ट ‘वन स्टेप ग्रीनर’ शुरू करने का विचार आया था. उनका संगठन ‘जीरो वेस्ट इंडिया’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए काम कर रहा है. 

जीरो वेस्ट इंडिया पर काम

विहान ने पुरस्कार समारोह से एक दिन पहले इंटरव्यू में एसोसिएटेड प्रेस को बताया, 'हमें पूरी दुनिया को जीरो वेस्ट देने की जरूरत है.  इसका मतलब है कि न केवल भारत, हर एक शहर, हर कस्बे, हर गांव में ऐसा करने की जरूरत है. वास्तव में इस संदेश को पूरी दुनिया के साथ शेयर किया जाना चाहिए.' वन स्टेप ग्रीनर प्रोजेक्ट अब पूरे दिल्ली में 1,500 से अधिक घरों, स्कूलों और ऑफिसों का दौरा करता है. विहान और नव की ऑर्गेनाइजेशन जीरो वेस्ट इंडिया की ओर काम करते हैं. 

विहान का कहना है कि दुनियाभर के नेताओं को वन स्टेप ग्रीनर की सफलता को जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण से निपटने के लिए एक सबक के रूप में लेना चाहिए. उन्होंने कहा, “जैसा कि हमने वन स्टेप के साथ देखा, जब हमने डोर टू डोर पिकअप किया, तो लोगों के लिए अपना कचरा बाहर छोड़ना बेहद आसान था. इसलिए आपको इन समाधानों को खोजना होगा, और ऐसे बहुत से युवा हैं जो पूरी दुनिया में इन समाधानों को खोज रहे हैं. आपको उन्हें प्रोत्साहित करना होगा."

पुरस्कार में मिला स्टडी एंड केयर ग्रांट और 100,000 यूरो का फंड

पुरस्कार के तौर पर दोनों भाइयों को स्टडी एंड केयर ग्रांट और 100,000 यूरो का एक फंड शामिल है. जिसमें से आधा उनकी परियोजना में जाता है और आधे का निवेश पुरस्कार आयोजक KidsRights द्वारा बच्चों के अधिकारों का समर्थन करने के लिए अन्य परियोजनाओं में किया जाता है.  पुरस्कार के पिछले विजेताओं में मलाला यूसुफजई और स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग शामिल हैं. 

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