
नौकरी छोड़कर एक स्टार्टअप करना किसी के लिए भी आसान नहीं होता. खासतौर पर तब जब आप एक हाई सैलरी जॉब कर रहे हो. ऐसे में अगर आप अपने अपना स्टार्टअप शुरू करने की सोचते हैं, तो माता-पिता का भी काफी प्रेशर रहता है कि आप इस सिक्योर जॉब को ना छोड़े. लेकिन एक शख्स ने अपने दिल की मानी और इस प्रेशर को हटाया.
कौन है यह शख्स
अपने यूनीक आईडिया पर विश्वास रखने वाले मोहित निझावन ने अपनी 90 लाख की सैलरी वाली नौकरी को छोड़ा और अपना स्टार्टअप शुरू किया. उन्होंने अपनी जॉब छोड़कर माइक्रोग्रीन्स स्टार्टअप शुरू किया. आज उनका स्टार्टअप एक करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू जनरेट कर रहा है.
क्या होता है माइक्रोग्रीन्स
यह एक प्रकार की फसल की खेती होती है, जिसको उगाने के लिए किसी खेत या ज़मीन की ज़रूरत नहीं होती. इसे एक कमरे में एक ट्रे के अंदर पानी डालकर उगाया जाता है. यह सब्जियां स्वाद के साथ कई गुणों से भरपूर होती हैं.
कैसे आया स्टार्टअप का ख्याल
मोहित चंडीगढ़ के रहने वाले हैं. वह मुंबई में एक फार्मा कंपनी में जॉब करते थे. अपनी जॉब के दौरान उन्होंने देखा कि जिन लोगों को कैंसर हो जाता है, उनके लिए इलाज करवाना काफी महंगा साबित होता है. महंगी दवाईयां और इलाज के बाद भी ज़्यादातर लोग ठीक नहीं हो पाते. उन्होंने अपने भाई समेत कई करीबी रिश्तेदारों को भी कैंसर से पीड़ित देखा.
कैंसर के इन मामलों ने मोहित को झकझोर कर रख दिया. उन्होंने पाया कि ये लाइफस्टाइल और खान-पान की समस्याओं के कारण हो रहा है. बस तभी उन्होंने 2020 में अपनी हाई पेइंग जॉब छोड़ दी और माइक्रोग्रीन्स उगाने का निर्णय लिया.
कैसे की स्टार्टअप की शुरुआत
उन्होंने घर की छत पर ब्रोकली, फूलगोभी, सरसों, मेथी, मूली आदि 21 प्रकार के बीजों के साथ माइक्रोग्रीन्स उगाना शुरू किया. हालांकि उन्हें इसके लिए परिवार की नाराजगी भी सहनी पड़ी. वह इसलिए क्योंकि मोहित के पैरेंट्स नहीं चाहते थे कि वह अच्छी खासी हाई सैलरी वाली नौकरी छोड़कर कारोबार की दुनिया में आएं.
मोहित ने बाद में Embryonic Greens Pvt Ltd नाम से कंपनी बनाई, जो आज Greenu ब्रांड के तहत माइक्रोग्रीन्स बेचती है. हर महीने उनकी यह कंपनी 12 लाख रुपए यानी सालाना करीब 1.44 करोड़ रुपये का कारोबार कर रही है. इसके अलावा मोहित किसानों को भी माइक्रोग्रीन्स उगाने की ट्रेनिंग देते हैं.