

भारत विकास करते हुए रफ्तार के साथ तरक्की की ओर बढ़ रहा है. ऐसे में घर में रहने वाले लोगों की राय में भी परिवर्तन आ रहा है. लोगों की राय को जानने के लिए इंडिया टुडे ग्रुप ने हाउव इंडिया लिव्स और कैडेंस इंटरनेशनल के साथ मिलकर एक सर्वे किया. बता दें कि यह सर्वे कहने को तो आम सर्वे था, लेकिन जिस मुद्दे पर यह सर्वे था वह काफी गंभीर था.
इस Gross Domestic Behaviour सर्वे में एक बात सामने निकल कर आई कि 10 में से 6 लोग आवारा कुत्तों से परेशान हैं. वहीं महिलाओं के साथ सार्वजनिक स्थान पर छेड़छाड़ भी एक गंभीर मुद्दा है. कुत्तों का मुद्दा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आजकल कई ऐसे मामले निकल कर सामने आते हैं. जहां पाया जाता है कि पड़ोसी ही दूसरे पड़ोसी के कुत्ते से परेशान है या किसी अवारा कुत्ते से. वहीं महिलाओं के साथ छेड़छाड़ का मामला तो और भी ज्यादा गंभीर मुद्दा बन जाता है.
कहां-कहां हुआ यह सर्वे
सर्वे में 21 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 98 जिलों में 9,188 लोगों से बातचीत कर उनकी राय ली गई है. सर्वे में 50.8 फीसदी पुरुष और 49.2 फीसदी महिलाओं ने हिस्सा लिया है. सर्वे में हिस्सा लेने वाले लोगों में 54.4 फीसदी शहरी और 45.6 फीसदी ग्रामीण लोग शामिल हैं और उनसे नागरिक शिष्टाचार, सार्वजनिक सुरक्षा, महिला-पुरुष के लिए नजरिया, विविधता और भेदभाव से जुड़े 30 सवाल पूछे गए थे जिसमें कुछ अहम सवालों पर उनकी राय हम आपको नीचे बता रहे हैं.
महिलाओं के साथ छेड़छाड़ पर क्या बोले लोग
सर्वे के दौरान महिलाओं के साथ छेड़छाड़ पर काफी लोगों ने अपनी राय दी. जिसमें से 42 फीसदी ने माना कि सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं के साथ छेड़छाड़ होती है. वहीं 56 फीसदी ने साफ इंकार कर दिया. तमिलनाडु के 17 फीसदी लोगों ने छेड़छाड़ की शिकायत की जबकि पड़ोसी राज्य कर्नाटक में 79% लोगों ने माना कि उनके इलाके में यह सामाजिक बुराई आम बात है.
अवारा कुत्तों के मुद्दे पर क्या है राय
मोहल्ले में अवारा कुत्तों के होने से क्या लोगों को कोई परेशानी होती है? इस सवाल के जवाब में 40 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें कोई परेशानी नहीं, जबकि 60 फीसदी का कहना था कि उन्हें इन कुत्तों से दिक्कत है.
इस सवाल के जवाब में केरल के 96% लोगों ने कहा कि वो आसपास आवारा कुत्ते नहीं चाहते जबकि उत्तराखंड के 64% लोगों को आवारा कुत्तों से कोई समस्या नहीं है.