
लोकसभा (Lok Sabha) में बुधवार को वक्फ संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill) पेश किया गया है. सदन में चर्चा के बाद इस बिल को पास कराने के लिए वोटिंग होगी. इस बिल का जहां विपक्ष विरोध कर रहा है तो वहीं केंद्र सरकार (Central government) इस बिल को पास कराने की तैयारी में है.
इस बिल का मुस्लिम समाज का एक तबका समर्थन कर रहा है तो दूसरा तबका विरोध जता रहा है. वक्फ संशोधन बिल का विरोध करने वालों का कहना है कि केंद्र सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक मामले में अपना हस्तक्षेप बढ़ा रही है और इसी उद्देश्य से इस बिल को पास कराना चाहती है. उधर, बिल का सपोर्ट कर रही मोदी सरकार का कहना है कि वक्फ संशोधन बिल के जरिए वह वक्फ से जुड़ी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करेगी.आइए जानते हैं वक्फ संशोधन विधेयक में क्या है?
कैसे काम करता है वक्फ
आपको मालूम हो कि हमारे देश में वक्फ संपत्तियों का प्रशासन फिलहाल वक्फ अधिनियम 1995 के तहत किया जाता है. इसे केंद्र सरकार की ओर से अधिनियमित और विनियमित किया जाता है. इसके मुख्य प्रशासनिक निकाय हैं केंद्रीय वक्फ परिषद, राज्य वक्फ बोर्ड और वक्फ न्यायाधिकरण. केंद्रीय वक्फ परिषद सरकार और राज्य वक्फ बोर्डों को नीति पर सलाह देती है, लेकिन वक्फ संपत्तियों को सीधे नियंत्रित नहीं करती है.
राज्य वक्फ बोर्ड हर राज्य में वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन और सुरक्षा करते हैं. वक्फ न्यायाधिकरण विशेष न्यायिक निकाय है, जो वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों को संभालते हैं. अभी वक्फ न्यायाधिकरणों की ओर से लिए गए निर्णयों को उच्च न्यायालयों में चुनौती नहीं दी जा सकती.
वक्फ संशोधन विधेयक के मुख्य उद्देश्य
आपको मालूम हो कि 8 अगस्त 2024 को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 और मुसलमान वक्फ निरसन विधेयक 2024 को पेश किया गया था. इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन करना है ताकि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का समाधान किया जा सके.
इस विधेयक को लाने का मकसद पिछले कानून की खामियों को दूर करना और अधिनियम का नाम बदलने जैसे बदलाव करके वक्फ बोर्डों की कार्यकुशलता को बेहतर करना है. इसके साथ ही वक्फ की परिभाषाओं को अपडेट करना है. रजिस्ट्रेशन यानी पंजीकरण की प्रक्रिया में सुधार करना है और वक्फ रिकॉर्ड के प्रबंधन यानी मैनेजमेंट में टेक्नोलॉजी की भूमिका बढ़ाना है.
वक्फ संशोधन बिल में क्या-क्या
1. वक्फ संशोधन बिल पास होने के बाद कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे.
2. वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को आखिरी नहीं माना जाएगा. उसके दावे को सिविल कोर्ट, हाईकोर्ट और उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी सकेगी.
3. दान में मिली जमीन को ही वक्फ की संपत्ति माना जाएगा. वक्फ की पूरी संपत्ति पोर्टल पर दर्ज की जाएगी.
4. यदि वक्फ ने सरकारी संपत्ति पर दावा किया तो जांच की जाएगी. सिर्फ इस्तेमाल के आधार पर किसी जमीन पर वक्फ का दावा स्वीकार नहीं होगा.
5. वक्फ संशोधन बिल धारा 40 को हटाता है. इससे वक्फ बोर्ड मनमाने ढंग से संपत्तियों को वक्फ घोषित करने से बाज आएंगे. पूरे गांव को वक्फ घोषित करने जैसे दुरुपयोग से बचा जाएगा.
6. वक्फ संशोधन बिल में कहा गया है कि वक्फ की जिन संपत्तियों पर नमाज पढ़ी जाती है, उनमें कोई दखल नहीं दिया जाएगा. पंजीकृत संपत्तियों में कोई दखल नहीं होगा.
7. वक्फ किसी भी आदिवासी इलाके में संपत्ति होने का दावा नहीं कर सकेगा.
8. जिला कलेक्टर के बजाए अब कलेक्टर से ऊपरी रैंक के अधिकारी को संपत्ति का मालिकाना हक तय करने और राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपने का अधिकार होगा.
9. वक्फ ट्रिब्यूनल में 3 सदस्य होंगे. इनमें से एक मुस्लिम कानून के जानकार, इसके साथ ही पूर्व या मौजूदा जिला जज को अध्यक्ष बनाया जाएगा. तीसरा सदस्य राज्य सरकार में सह सचिव की रैंक के होंगे.
10. सेंट्रल वक्फ काउंसिल में कम से कम दो सदस्य गैर मुस्लिम होंगे. काउंसिल में नियुक्त किए गए सांसदों, पूर्व जजों और गणमान्यों का मुस्लिम होना जरूरी नहीं होगा. मुस्लिम सदस्यों में कम से कम दो महिलाओं का होना जरूरी है.
11. वक्फ संशोधन बिल केंद्र सरकार को रजिस्ट्रेशन, वक्फ के खातों के प्रकाशन जैसे नियमों में बदलाव का अधिकार देता है. केंद्र सरकार वक्फ के खातों का ऑडिट कैग या तय अधिकारी से करा सकेगी.
12. वक्फ संशोधन बिल में बोहरा और अगाखानी क लिए अलग बोर्ड तैयार करने की अनुमति दी गई है.
13. वक्फ संशोधन विधेयक का नाम बदलकर Unified Waqf Management Empowerment Efficiency and Development रखा जाएगा ताकि इसके अद्यतन उद्देश्यों को दर्शाया जा सके.
14. यह विधेयक केवल उन संपत्तियों पर लागू होगा जिन्हें वक्फ घोषित किया गया है. यह निजी या व्यक्तिगत संपत्ति को प्रभावित नहीं करता है जिसे वक्फ के रूप में दान नहीं किया गया है.
15. यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के धार्मिक या ऐतिहासिक स्वरूप में हस्तक्षेप नहीं करता है. इसका उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना और धोखाधड़ी वाले दावों पर अंकुश लगाना है.
16. वक्फ संशोधन बिल राज्य वक्फ बोर्डों में शिया, सुन्नी, बोहरा, अघाखानी और पिछड़े मुस्लिम समुदायों का व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है.
17. यह अनिवार्य करता है कि शिया, सुन्नी और पिछड़े मुस्लिम समुदायों में से प्रत्येक से कम से कम एक सदस्य बोर्ड में होना चाहिए.
18. किसी भी कानून के तहत मुसलमानों द्वारा बनाए गए ट्रस्टों को अब वक्फ नहीं माना जाएगा, जिससे ट्रस्टों पर पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित होगा.
19. परिसीमा अधिनियम 1963 अब वक्फ संपत्ति के दावों पर लागू होगा, जिससे लंबे समय तक चलने मुकदमेबाजी कम होगी.
20. सालाना 1 लाख रुपए से अधिक कमाने वाली वक्फ संस्थाओं को राज्य सरकार द्वारा नियुक्त लेखा परीक्षकों द्वारा लेखा परीक्षा करानी होगी.
21. पारदर्शी वक्फ प्रबंधन जरूरी होगा. जवाबदेही बढ़ाने के लिए मुतवल्लियों को छह महीने के भीतर केंद्रीय पोर्टल पर संपत्ति का विवरण दर्ज करना होगा.