भारत में अब तक H3N2 वायरस के 90 से अधिक मामले सामने आए हैं. देश में फ्लू जैसे वायरस के बढ़ते मामले चिंता का सबब बनते जा रहे हैं. इसे 'हांगकांग फ्लू' के नाम से भी जाना जाता है. H3N2 इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण देश में दो लोगों की मौत भी हो चुकी है. हालांकि राहत की बात ये है कि इसके मामले मार्च के आखिर में कम हो सकते हैं.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इसकी रियल टाइम ट्रैकिंग कर रहा है. इन्फ्लुएंजा के H3N2 वेरिएंट्स के मामलों की भी कड़ी निगरानी की जा रही है. आईसीएमआर ने इसके रोकथाम के लिए बरती जाने वाली सावधानियों की एडवाइजरी भी जारी की है. विशेज्ञषों का कहना है कि मार्च के अंत तक इन्फ्लुएंजा के मामलों में कमी आ सकती है.
H3N2 influenza के लक्षण
H3N2 influenza के लक्षणों में ठंड लगना, लगातार खांसी, बुखार, उल्टी, गले में खराश, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, दस्त, छींक और नाक बहना शामिल हैं. आईएमए के अनुसार, एच3एन2 संक्रमण आमतौर पर पांच-सात दिनों तक रहता है, लेकिन खांसी तीन सप्ताह तक बनी रह सकती है.
उपचार और रोकथाम
H3N2 वायरस से पीड़ित लोगों को oseltamivir, zanamivir, peramivir, और baloxavir दवाएं दी जा रही हैं. कुछ सावधानियों में सालाना फ्लू टीकाकरण, नियमित रूप से हाथ धोना शामिल है. खासतौर पर टॉयलेट के बाद, खाना खाने से पहले, चेहरे, नाक या मुंह को छूने से पहले. इसके अलावा लोगों को भीड़-भाड़ वाली जगह जाने से से बचने की सलाह दी जाती है. अगर आपको फ्लू जैसे कोई लक्षण हैं तो दूसरो से दूरी बनाकर रखें. फेस मास्क पहनें. हाइड्रेटेड रहें और खूब सारे तरल पदार्थों का सेवन करें. शारीरिक दूरी बनाए रखें. गले के संक्रमण को रोकने के लिए अच्छा घर का बना खाना खाने की भी सलाह दी जाती है.
किन लोगों को है ज्यादा खतरा?
सीडीसी के अनुसार पांच साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोग, गर्भवती महिलाएं, और अस्थमा, मधुमेह, हृदय रोग, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को इसका खतरा ज्यादा है. अगर ऐसे लोग इस वायरस से संक्रमित हो जाते हैं तो उनके लिए ये जानलेवा साबित हो सकता है.