
केंद्र सरकार (Central government) 2 अप्रैल को वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill) को संसद में पेश करने जा रही है. आइए जानते हैं आखिर क्यों मोदी सरकार वक्फ संशोधन विधेयक पारित कराना चाह रही है. कौन-कौन से दल इस बिल के पक्ष में और कौन सी पार्टियां विपक्ष में हैं. हम यह भी जानेंगे कि लोकसभा और राज्यसभा का पूरा नंबरगेम क्या है?
क्या होता है वक्फ
हमारे देश में वक्फ की अवधारणा दिल्ली सल्तनत के समय से चली आ रही है. वक्फ कोई भी चल या अचल संपत्ति हो सकती है. इस्लाम को मानने वाला कोई भी व्यक्ति धार्मिक कार्यों के लिए अपनी संपत्ति को वक्फ के लिए दान कर सकता है. बस उस व्यक्ति की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए. इस दान की हुई संपत्ति का मालिक व्यक्ति नहीं बल्कि अल्लाह को माना जाता है. हालांकि इसे संचालित करने के लिए वक्फ बोर्ड होते हैं. सभी वक्फ बोर्ड वक्फ अधिनियम 1995 के तहत काम करते हैं.
पहली बार वक्फ अधिनियम कब किया गया था पारित
देश की आजादी मिलने के बाद साल 1954 में वक्फ अधिनियम पहली बार संसद की ओर से पारित किया गया था. साल 1995 में इसे एक नए वक्फ अधिनियम से बदला गया, जिसने वक्फ बोर्डों को और ज्यादा शक्ति दी. साल 2013 में वक्फ अधिनियम में संशोधन किया गया. इसमें वक्फ बोर्डों को मुस्लिम दान के नाम पर संपत्तियों का दावा करने के लिए असीमित अधिकार प्रदान किए गए. संशोधनों ने वक्फ संपत्तियों की बिक्री को असंभव बना दिया.
क्या है सरकार का कहना
वक्फ संशोधन विधेयक के संबंध में केंद्र सरकार का कहना है कि इसके जरिए वह वक्फ से जुड़ी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करेगी. विधेयक में वर्तमान अधिनियम में दूरगामी परिवर्तन की बात कही गई है. इसमें केंद्रीय और राज्य वक्फ बोर्ड में मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना भी शामिल है. इसके साथ ही किसी भी धर्म के लोग इसकी कमेटियों के सदस्य हो सकते हैं. उधर, विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि इस तरह का विधेयक मुस्लिम पक्ष की ताकत को कम करेगा और वक्फ पर सरकारी नियंत्रण बढ़ेगा.
जेपीसी ने इस बिल का ड्राफ्ट किया है तैयार
आपको मालूम हो कि वक्फ संशोधन विधेयक 2024 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक 2024 को लोकसभा में 8 अप्रैल 2024 को केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने पेश किया था. उस समय विपक्ष के भारी हंगामे के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी के पास भेज दिया गया था. जेपीसी ने इस बिल का ड्राफ्ट तैयार किया है. इस बिल को कैबिनेट की भी मंजूरी मिल चुकी है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने जब विधेयक को पेश किया था, तब कहा था कि वक्फ संशोधन विधेयक सच्चर कमेटी की सिफारिशों के आधार पर ही लाया गया है.
इसी में कहा गया है कि राज्य और केंद्रीय वक्फ बोर्ड में दो महिलाएं होनी चाहिए. इसी में की गई सिफारिशों को लागू करने के लिए हम यह बिल लेकर आए हैं. इस बिल में जो भी प्रावधान हैं, उसमें संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं किया गया है. आपको मालूम हो कि पहले वक्फ बिल में प्रावधान था कि वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला ही आखिर माना जाएगा जबकि अब किसी भी तरह के संपत्ति विवाद में हाईकोर्ट जा सकेंगे. पहले कोई भी संपत्ति सिर्फ दावे के आधार पर वक्फ की हो जाती थी. नए बिल में कलेक्टर को संपत्ति का सर्वे करने और संपत्ति निर्धारण का अधिकार है.
लोकसभा में बिल को पास कराने के लिए बहुमत का आंकड़ा
वर्तमान समय में लोकसभा में कुल 542 सांसद हैं. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास सबसे अधिक 240 सांसद हैं. सहयोगी दलों को जोड़कर एनडीए (NDA) के पास लोकसभा में कुल सांसदों की संख्या 294 है. लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए बहुमत का आंकड़ा 272 चाहिए.
ऐसे में मोदी सरकार यह मानकर चल रही है लोकसभा में इस बिल को पास कराने में कोई परेशानी नहीं होगी. इस बिल के समर्थन में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) भी समर्थन में आ गई है. इसके अलावा एनडीए से जुड़ी कई अन्य पार्टियां भी इस बिल के पक्ष में हैं.
राज्यसभा में क्या है स्थिति
उच्च सदन यानी राज्यसभा में वर्तमान समय में सदस्यों की कुल संख्या 236 है. यहां भी बीजेपी के पास सबसे अधिक 98 सदस्य हैं. वहीं एनडीए की बात की जाए तो कुल सदस्यों की संख्या 115 है. मनोनीत 6 सदस्यों को शामिल करने के बाद यह संख्या 121 तक पहुंच जाएगी.
राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए बहुमत का आंकड़ा 119 चाहिए. इस तरह से यहां भी एनडीए के पास बहुत से दो अधिक संख्या है. उधर, राज्यसभा में कांग्रेस के पास कुल 27 सदस्य हैं. इंडिया गठबंधन में कुल सदस्यों की संख्या 85 है. राज्यसभा में तीन ऐसे भी सदस्य हैं जो किस गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं.