
कहानी एक ऐसे पिता की जो अपने दोनों बच्चो को डॉक्टर बनते देखना चाहता था. बात गुजरात के पाटण की है जहां एक पिता अपनी एक बेटी और बेटे को डॉक्टर बनाना चाहता था. नितिनभाई प्रजापति पाटन से करीबन 400 किलोमीटर दूर मुद्रा की एक निजी कम्पनी में काम करते थे. उनका सपना था कि उनकी बेटी और बेटा पढ़ लिखकर डॉक्टर बनें. नितिनभाई अपने दोनों बच्चो को परीक्षा के लिए स्कूल छोड़ने और लेने जाते थे.
पिता का सपना साकार करने में लगे बच्चे
नितिनभाई के बच्चों को स्कूल से लाने और छोड़ने का काम रोज बिना किसी नागे के कर रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. रविवार के दिन पास के गांव में किसी पूजा के लिए नितिनभाई गए थे जिसके बाद वहां से लौटते समय उन्हें अचानक से दिल का दौरा पड़ा और सोमवार सुबह 4 बजे उनका देहांत हो गया. नितिनभाई की बेटी महक 12वीं और बेटा वेध 10वीं का छात्र है. दोनों बच्चे मन लगाकर पढ़ाई करके पिता के सपने को साकार करने में लगे हुए थे. पिता की अचानक हुई मौत ने उन्हें झकझोर कर रख दिया. लेकिन उन्होंने ठान लिया कि वो अपने पिता का सपना पूरा करके रहेंगे.
पहले परीक्षा दी फिर किया अंतिम संस्कार
अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए वेध और बेटी महक सोमवार को परीक्षा देने पहुंचे. घर में मातम छाया हुआ था लेकिन मन में संकल्प बरकरार था. वेध बताते हैं कि उनके पापा ने कहा था कि बेटा डॉक्टर बनकर पहला इंजेक्शन मुझे लगाना. इसी बात को लेकर पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए दोनों बच्चे पहले बोर्ड की परीक्षा देने गए. उनके मन ये दुःख था कि आज उनके पिता उन्हें छोड़ने नहीं आये. मन दुखी और आंखे नम थी लेकिन पिता के सपने को साकार करने लिए मन को मजबूत किया और घर आने के बाद उन्होंने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया. परीक्षा देकर इन दोनों बच्चो में अपने पिता को असली श्रद्धांजलि दी.
(विपिन प्रजापति की रिपोर्ट)