
वीरसेन सरोहा जब 1990 के दशक में मंडोला में 1600 स्क्वेयर मीटर के घर में रहते थे तब उनके आसपास एक छोटा सा गांव बसा हुआ था. जब 1998 में उत्तर प्रदेश हाउसिंग बोर्ड ने दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर पर छह गांवों को नोटिस भेजा कि वह मंडोला हाउसिंग स्कीम के लिए उनकी 2614 एकड़ जमीन का अधिगृहण चाहता है.
कई परिवारों को अपनी जमीन छोड़ने के लिए मनाया गया, लेकिन वीरसेन इसके लिए राज़ी नहीं हुए. उन्होंने इलाहबाद हाई कोर्ट का रुख किया. विरोध प्रदर्शनों के कारण यह हाउसिंग स्कीम कभी पूरी भी न हो सकी. जब कुछ सालों बाद हाउसिंग बोर्ड ने यह जमीन दिल्ली-देहरादून हाइवे के लिए नेशनल हाइवे ऑथोरिटी को दे दी. लेकिन परेशानी वही- वीरसेन सरोहा का घर. दिल्ली-देहरादून हाइवे अब लगभग तैयार हो चुका है लेकिन वह घर बड़ी बाधा बना हुआ है.
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग पूरा होने वाला है, लेकिन मंडोला में दिवंगत वीरसेन सरोहा का दो मंजिला मकान कानूनी लड़ाई के कारण इसे रोक रहा है. यह विवाद 1998 की मंडोला हाउसिंग स्कीम से शुरू हुआ. यहां यूपी हाउसिंग बोर्ड ने 1,100 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से ज़मीन का अधिग्रहण किया था.
वीरसेन ने मुआवज़ा लेने से इनकार कर दिया और अदालत चले गए. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट हाउसिंग स्कीम के खिलाफ प्रोटेस्ट करने वाले नीरज त्यागी के हवाले से कहती है कि सरोहा उन लोगों में से थे जो मुआवज़े की रकम बढ़वाना चाहते थे. उन्होंने 2007 में अदालत का रुख किया. मामला लंबा खिंचा और फैसला आने से पहले ही सरोहा का निधन हो गया.
साल 2017 से 2020 के बीच हाइवे ऑथोरिटी ने एक्सप्रेसवे बनाने का काम शुरू कर दिया. प्राधिकरण को मंडोला में रैंप बनाने के लिए मंडोला में जमीन की जरूरत थी. हाउसिंग बोर्ड ने यह जमीन हाइवे प्राधिकरण को दे दी जिसके बाद मामला और उलझ गया. अब 2024 में सरोहा के पोते ने भारतीय हाइवे प्राधिकरण को ज़मीन हस्तांतरण को चुनौती दी है. उन्होंने अदालत में दावा किया है कि जमीन हाउसिंग बोर्ड की थी ही नहीं.
अपने आखिरी चरण में है हाइवे
मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है. अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होनी है. अक्षरधाम से उत्तराखंड तक फैला 212 किलोमीटर का एक्सप्रेसवे अपने अंतिम चरण में है. एक्सप्रेसवे का उद्देश्य दिल्ली-बागपत ड्राइव के समय को 30 मिनट से कम करना है. अगर यह हाइवे बन जाता है तो लोनी से होते हुए दिल्ली-बागपत को कनेक्ट किया जा सकेगा.