scorecardresearch

होटल वाले जबरन नहीं वसूल सकते बिल में Service Charge! लेकिन क्या है ये? यह कैसे तय होता है? इसे लेकर नियम जान लें

दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले ने उपभोक्ताओं को अनावश्यक खर्च से बचाने का रास्ता साफ कर दिया है. अब होटल और रेस्टोरेंट्स सर्विस चार्ज को अनिवार्य रूप से नहीं जोड़ सकेंगे, और ग्राहकों को उनकी मर्जी के बिना भुगतान करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा. अगर आप भी कभी किसी रेस्टोरेंट में जबरन सर्विस चार्ज देने के लिए मजबूर किए जाते हैं, तो अब आप अपने अधिकारों के बारे में जागरूक रह सकते हैं और उचित कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं.

Service charge Service charge
हाइलाइट्स
  • इसे देना जरूरी नहीं

  • इसे लेकर नियम जान लें

होटल और रेस्टोरेंट में खाने के बिल में लगने वाला 'सर्विस चार्ज' अब ग्राहकों पर जबरन नहीं थोपा जा सकेगा. दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने हालिया फैसले में इसे "गुमराह करने वाला और गैरकानूनी" करार दिया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने रेस्टोरेंट और होटलों द्वारा अनिवार्य रूप से वसूले जाने वाले "सर्विस चार्ज" को गैरकानूनी करार दिया. कोर्ट ने कहा कि यह लोगों को गुमराह करता है और इसे देखकर ऐसा लगता है कि यह कोई सरकारी टैक्स है, जबकि ऐसा नहीं है. इस फैसले के बाद अब कोई भी होटल या रेस्टोरेंट ग्राहकों से बिना उनकी सहमति के सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकता. 

क्या है सर्विस चार्ज और इसे कौन तय करता है?
सर्विस चार्ज अलग से लिया जाने वाला चार्ज है, जो रेस्टोरेंट और होटल खाने के बिल में जोड़ते हैं. यह आमतौर पर 5% से 20% तक हो सकता है और ग्राहकों से यह फी टिप के रूप में वसूला जाता था. हालांकि, इसका निर्धारण रेस्टोरेंट खुद करते हैं और यह सरकार द्वारा लगाया गया कोई टैक्स नहीं होता. फिर भी, कई बार यह ग्राहकों को भ्रमित करता है कि यह कोई सरकारी शुल्क है, जो देना अनिवार्य है.

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला! सर्विस चार्ज अनिवार्य नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्रतिभा सिंह की बेंच ने कहा कि कर वसूलने का अधिकार सिर्फ सरकार का होता है, इसलिए रेस्टोरेंट का सर्विस चार्ज "लेवी" (Tax) के रूप में लगाना गलत है. कोर्ट ने कहा, “रेस्टोरेंट द्वारा अनिवार्य रूप से सेवा शुल्क लेना ग्राहकों के लिए भ्रम पैदा करता है और यह उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन है."

सम्बंधित ख़बरें

इसके साथ ही, कोर्ट ने सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) द्वारा जुलाई 2022 में जारी उन गाइडलाइंस को सही ठहराया, जिनमें कहा गया था कि रेस्टोरेंट और होटल सर्विस चार्ज को अनिवार्य रूप से नहीं जोड़ सकते.

क्यों विवादों में था सर्विस चार्ज?
दरअसल, ग्राहकों को अनिवार्य रूप से देना पड़ता था, चाहे सेवा अच्छी हो या खराब, ग्राहक को इसे देना ही पड़ता था. कई बार इसे जीएसटी या अन्य सरकारी टैक्स के समान मान लिया जाता था. वेटर्स और स्टाफ को इसका सही फायदा नहीं मिलता था. दावा किया जाता था कि यह कर्मचारियों के लिए है, लेकिन इसका सही बंटवारा नहीं होता था.

कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु
कोर्ट ने कहा, सर्विस चार्ज अनिवार्य नहीं हो सकता. यह  ग्राहक की इच्छा पर निर्भर करेगा कि वह इसे दे या न दे. साथ ही कहा कि CCPA के नियम मानने होंगे, होटल और रेस्टोरेंट को इसका पालन करना होगा. सर्विस चार्ज का नाम बदलने की सलाह भी दी है. इसे ‘स्टाफ कंट्रीब्यूशन’ या वोलंटरी टिप’ कहा जा सकता है, लेकिन यह बिल में पहले से नहीं जुड़ा होना चाहिए.

कोर्ट ने रेस्टोरेंट यूनियन की याचिका भी खारिज कर दी है. नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) और होटल एवं रेस्टोरेंट संघ (FHRAI) की अपील को खारिज किया गया और 1-1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. उपभोक्ता अब किसी भी रेस्टोरेंट में सर्विस चार्ज जबरन जोड़ने का विरोध कर सकते हैं.

क्या अब सर्विस चार्ज पूरी तरह से खत्म हो गया है?
नहीं, कोर्ट ने केवल इसे अनिवार्य रूप से जोड़ने पर रोक लगाई है. ग्राहक अब अपनी मर्जी से सर्विस चार्ज दे सकते हैं, लेकिन यह बिल में पहले से नहीं जोड़ा जाएगा.

ऐसे में अगर किसी होटल या रेस्टोरेंट में बिल में अनिवार्य रूप से सर्विस चार्ज जोड़ा गया हो, तो ग्राहक इन कदमों का पालन कर सकते हैं.

  • बिल में से सर्विस चार्ज कटवाने की मांग करें- यह आपका कानूनी अधिकार है.
  • CCPA में शिकायत करें- राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) या consumerhelpline.gov.in पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं.
  • सोशल मीडिया पर शिकायत करें- कई बार ट्विटर, फेसबुक आदि पर शिकायत करने से त्वरित कार्रवाई होती है.
  • स्थानीय ग्राहक फोरम में मामला दर्ज करें- कंज्यूमर कोर्ट में जाने का भी ऑप्शन आपके पास है.

क्या टिप देना भी बंद हो जाएगा?
बिल में सर्विस चार्ज अनिवार्य रूप से नहीं जोड़ा जाएगा, लेकिन ग्राहक अपनी मर्जी से वेटर या स्टाफ को टिप दे सकते हैं.
नए नियमों के बाद होटल और रेस्टोरेंट्स को क्या करना होगा?

  1. बिल में पहले से सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकते.
  2. ग्राहक को पहले से इसकी जानकारी देनी होगी कि सर्विस चार्ज स्वैच्छिक है.
  3. स्टाफ के लिए अलग से कोई योगदान लेना है, तो उसे स्पष्ट करना होगा.

दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले ने उपभोक्ताओं को अनावश्यक खर्च से बचाने का रास्ता साफ कर दिया है. अब होटल और रेस्टोरेंट्स सर्विस चार्ज को अनिवार्य रूप से नहीं जोड़ सकेंगे, और ग्राहकों को उनकी मर्जी के बिना भुगतान करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा.

अगर आप भी कभी किसी रेस्टोरेंट में जबरन सर्विस चार्ज देने के लिए मजबूर किए जाते हैं, तो अब आप अपने अधिकारों के बारे में जागरूक रह सकते हैं और उचित कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं.