
फूलगोभी सिर्फ सफेद ही नहीं... पीली और बैंगनी भी हो सकती है. और खेती से घाटा नहीं लाखों का मुनाफा भी हो सकता है, आपको बस खेती में थोड़ा प्रयोग करने की हिम्मत जुटानी होगी. जैसे कि पानीपत के प्रगतिशील किसान डॉ. जयपाल तंवर ने जुटाई. डॉ. जयपाल पूरे 70 एकड़ में अलग-अलग तरह की सब्ज़ियां उगाते हैं और वह भी अलग-अलग तकनीक से.
ड्रिप इरीगेशन से लेकर, पॉली हाउस, ओपन फार्मिंग और नेट हाउस तकनीक को अपनाकर डॉ. जयपाल मे खेती का मतलब बदल दिया है. वह रंग-बिरंगी गोभी के साथ-साथ लाल-पीली शिमला मिर्च और ब्रोकली भी उगाते हैं और इसी खेती से अब न सिर्फ लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं बल्कि 50-60 लोगों को रोज़गार भी दे रहे हैं.
प्रोफेसर बना किसान
हरियाणा के पानीपत जिले के पट्टी कल्याणा गांव के रहने वाले डॉ. जयपाल ने असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर खेती को अपनाया और इसमें बड़ी सफलता पाई. डॉ. जयपाल ने बताया कि उन्हें नौकरी से ज्यादा कमाई खेती में हो रही है. डॉ. जयपाल ने बताया कि उन्होंने खेती में सरकारी नीतियों का पालन किया और इससे उन्हें एक एकड़ से 10 से 12 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हो रहा है, जबकि आम किसान एक एकड़ से केवल 40 से 50 हजार रुपये ही कमा पाते हैं.
नौकरी छोड़ने का निर्णय
डॉ. जयपाल ने 2014-15 में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी छोड़ दी थी और पिछले 11 साल से खेती को अपने आय का जरिया बना लिया है. उन्होंने बताया कि खेती में उनकी कमाई नौकरी से 10 गुना ज्यादा हो गई है. डॉ. जयपाल ने अपनी खेती से 50 से 60 लोगों को रोजगार भी दिया है. उनके चेहरे की मुस्कान बताती है कि मेहनत के साथ-साथ सूझबूझ और नई तकनीक का इस्तेमाल भी जरूरी है, ताकि मेहनत का भरपूर फायदा मिल सके.
डॉ. जयपाल की कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो खेती को घाटे का सौदा मानते हैं. उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर सही तकनीक और नवाचार का उपयोग किया जाए तो खेती में भी बड़ी सफलता पाई जा सकती है.