

पंचकूला में स्थित आईटीबीपी भानु सेंटर आजकल देश के अलग-अलग वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, Reserves और पार्क के लिए छह K9 soldier को anti poaching, तस्करों से वन्यजीवों को बचाने को लेकर प्रशिक्षण और ट्रेनिंग दे रहा है. उसके साथ-साथ कूनो नेशनल पार्क के 20 सीटों की रखवाली करने को लेकर भी डॉग इलू को पूरी तरह से प्रशिक्षित किया गया है. अगले महीने अप्रैल में तमाम K9 डॉग यहां से प्रशिक्षित होकर निकलेंगे.
आईटीबीपी भानु के नेशनल ट्रेनिंग सेंटर फॉर डॉग में यह K9 सोल्जर की ट्रेनिंग दी जा रही है. यह केनाइन सोल्जर्स वन्य जीवन से जुड़े सामान को सूंघने में पूरी तरह से सक्षम हो गए हैं. अब यह सोल्जर बाघ की खाल और हड्डियों, तेंदुए की खाल और हड्डियों, हिरण के सींग, सांभर, हाथी के दांत और चंदन की लकड़ी को सूंघ कर उसे पकड़ने में पूरी तरह से दक्ष हो चुके हैं. पिछले लगभग 7 महीनों से इन K9 डॉग्स को ट्रेनिंग देकर पूरी तरह से दक्ष और प्रशिक्षित कर दिया गया है.
इसके अलावा मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में मौजूद सीटों की सुरक्षा का जिम्मा भी इनमें से एक डॉग इलू के हवाले हैं जिसे पूरी तरह से ट्रेन कर दिया गया है और अगले महीने अप्रैल में वह वहां पर चीतों की सुरक्षा का जिम्मा संभाल लेगा. नहीम मोहम्मद ने गुड न्यूज़ टुडे को खास बातचीत में बताया कि इलू की उम्र 8 महीने हैं और Nambia से आए चीतों की सुरक्षा का जिम्मा अब इलू का होगा. Naeem मोहम्मद ने बताया कि पिछले लगभग 7 महीनों के कड़े अभ्यास के बाद अब इलू पूरी तरह से ट्रेंड हो चुका है.
K9 डॉग को इस तरह से प्रशिक्षण दिया गया है कि वह अपने हैंडलर की आंख के इशारे को समझते हैं और तुरंत उनके ऑर्डर को सुनते और अमल में लेकर आते हैं. इसके अलावा पांच डॉग्स को बांदीपुर टाइगर रिजर्व पार्क कर्नाटक, राजीव गांधी नेशनल पार्क, karnatak, वाल्मिकी टाइगर रिजर्व बिहार, चंद्रभागा टाइगर रिजर्व पार्क कर्नाटक, काली टाइगर रिजर्व पार्क कर्नाटक में भेजा जाएगा.
आईटीबीपी के महानिरीक्षक ईश्वर सिंह दुहन ने गुड न्यूज़ टुडे से खास बातचीत मैं बताया कि डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और ट्रैफिक इंडिया के निवेदन पर हम वन्यजीवों को तस्करों के शिकार से बचाने को लेकर इन K9 डॉग को पूरी तरह से ट्रेन करते हैं जैसा कि सब जानते हैं कि डॉग्स के अंदर सूंघ ने की क्षमता होती है. इसी में हम इन्हें फिर प्रशिक्षण देते हैं जिससे यह पूरी तरह से वन्य जीवो की तस्करी से उन जीवों को बचाने में मदद कर सकते हैं. ईश्वर सिंह ने बताया कि पिछले 5 सालों में इन्होंने अलग अलग राज्य में 500 से ज्यादा क्राइम को रोकने मैं मदद की है.