
कर्नाटक के स्पाइडर मैन के नाम से मशहूर ज्योतिराज के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है. दरअसल, पर्वतारोही ज्योतिराज उर्फ कोथिराजा ने करंजेश्वरा की कठिन चट्टान पर चढ़ाई कर इतिहास रच दिया है. इस दौरान सैकड़ों लोगों ने उनके साहसिक कार्य की सराहना की और तालियां बजाईं.
ज्योतिराज की अद्भुत चढ़ाई
ज्योतिराज, जिन्हें मंकी मैन और मंकी किंग के नाम से भी जाना जाता है ने करंजेश्वरा की 350 फीट ऊंची चट्टान पर बिना किसी सहायता के चढ़ाई करने में सफल रहे. मंगलुरु के दक्षिण कन्नड़ जिले में स्थित इस चट्टान पर ज्योतिराज ने महज आधे घंटे में चढ़ाई पूरी कर ली. इस अद्भुत कारनामे को देखने के लिए वहां मौजूद लोगों ने उनकी सराहना की और उत्साहवर्धन किया.
बिना किसी सहायता के चढ़ जाते हैं दीवारों और खंभों पर
ज्योतिराज ने करंजेश्वरा की 350 फीट ऊंची चट्टान पर चढ़ने के लिए शुरू में रस्सी का सहारा लिया और फिर नंगे हाथों से चढ़ाई पूरी की. उनकी इस अद्भुत कला को देखकर लोग दांतों तले उंगली दबा बैठे. ज्योतिराज की पकड़ इतनी मजबूत है कि वे बिना किसी सहायता के ऊंची दीवारों, खंभों और पहाड़ों पर चढ़ जाते हैं.
प्रेरणादायक है कहानी
ज्योतिराज की कहानी भी कम प्रेरणादायक नहीं है. एक समय वे जीवन से निराश होकर ऊंचाई पर चढ़कर जान देने जा रहे थे. तभी उन्होंने एक बंदर को देखा जो तेजी से ऊपर चढ़ गया. ज्योतिराज ने बंदर की स्टाइल को कॉपी किया और फिर कमाल कर दिया. वहां मौजूद लोगों ने उनकी सराहना की और उन्हें जीवन का उद्देश्य मिल गया. इसके बाद उन्होंने चट्टानों पर चढ़ने का सिलसिला शुरू किया और स्पाइडर मैन के रूप में पहचान बनाई. ज्योतिराज का लक्ष्य अमेरिका स्थित प्रतिष्ठित एंजेल फॉल्स पर चढ़ना है.
जीवन का संदेश
ज्योतिराज की कहानी उन लोगों के लिए सबक है, जो जीवन को चट्टान चढ़ने की तरह मुश्किल मानकर छोड़ना चाहते हैं. वे जानते नहीं कि बस चढ़ने भर की हिम्मत जुटानी है. फतह तो ज्योतिराज की तरह मिल ही जाती है. उनकी कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में हिम्मत और दृढ़ संकल्प से किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है.