
मेरठ जिला जेल में बंदी मुस्कान और साहिल को जेल मैन्युअल के तहत कार्य आवंटित कर दिए गए हैं. दोनों ने अपनी रुचि के अनुसार जेल के भीतर काम करने की इच्छा जताई, जिसे जेल प्रशासन ने मंजूरी दे दी. मुस्कान को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि साहिल खेती करेगा, जिसके लिए उसे ₹50 प्रतिदिन मजदूरी मिलेगी.
मुस्कान को मिलेगा सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण
जेल में बंद मुस्कान ने सिलाई-कढ़ाई सीखने की इच्छा जाहिर की थी. जेल प्रशासन के अनुसार, उसे कपड़े सिलने का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वह इस कौशल में निपुण हो सके. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वह अलग-अलग कपड़ों की सिलाई कर सकेगी. हालांकि, जेल मैन्युअल के तहत सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण को श्रमिक कार्य की श्रेणी में नहीं रखा गया है, इसलिए उसे इस काम के लिए कोई मजदूरी नहीं मिलेगी. जब वह इस कौशल में दक्ष हो जाएगी और कपड़ों की सिलाई करने लगेगी, तब उसे पैसे देने की व्यवस्था की जा सकती है.
साहिल करेगा खेती, मिलेगा ₹50 प्रतिदिन
साहिल ने खेती-किसानी करने की इच्छा जताई, जिसे देखते हुए उसे सब्जी और फल उगाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा. वह जेल परिसर में स्थित खेतों में काम करेगा, और उसके द्वारा उगाई गई सब्जियां जेल में बंद अन्य कैदियों के भोजन के लिए उपयोग में लाई जाएंगी. साहिल को नॉन-स्किल्ड वर्कर (अप्रशिक्षित श्रमिक) के रूप में कार्य सौंपा गया है, जिसके तहत उसे खेती का प्रशिक्षण मिलेगा और प्रतिदिन ₹50 मजदूरी दी जाएगी. हालांकि, अगर वह खेती करने में असमर्थ रहता है, तो उसे किसी अन्य कार्य में लगाया जाएगा या अन्य प्रकार की ट्रेनिंग दी जाएगी.
जेल नियमों के तहत मिला कार्य
मेरठ जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जेल मैनुअल के अनुसार किसी भी बंदी को 10 दिन पूरे होने के बाद कार्य आवंटित किया जाता है. मुस्कान और साहिल दोनों 1 अप्रैल से अपने-अपने चुने हुए कार्यों को शुरू करेंगे. यह प्रक्रिया जेल सुधार प्रणाली का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कैदियों को कौशल प्रदान करना और उन्हें व्यस्त रखना है.
जेल में कैदियों के लिए तीन प्रकार के काम
जेल मैनुअल के अनुसार, कैदियों को तीन श्रेणियों में कार्य सौंपे जाते हैं-
मेरठ जिला जेल प्रशासन का मानना है कि इस तरह के कार्यों से कैदियों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है और जेल से बाहर आने के बाद वे अपने जीवन को एक नई दिशा दे सकते हैं.