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Door in the Face टेक्निक से व्यक्ति ने पा ली 25 लाख रु ज्यादा सैलरी, जानें सैलरी नेगोशिएशन की यह अनोखी स्ट्रेटजी!

यह एक साइकोलॉजिकल स्ट्रेटजी है, जिसे प्रसिद्ध लेखक रॉबर्ट सियालदिनी (Robert Cialdini) ने अपनी किताब "Influence" में समझाया था. यह टेक्निक बातचीत में नेगोशिएशन को प्रभावी बनाने के लिए उपयोग की जाती है.

salary negotiation tips (Representative Image/Unsplash) salary negotiation tips (Representative Image/Unsplash)

अगर आपको एक नई नौकरी में 10 से 30 हजार डॉलर तक ज्यादा सैलरी मिल जाए तो? सुनने में यह किसी सपने जैसा लगता है, लेकिन TJ Patel नाम के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने इसे हकीकत बना दिया. उन्होंने 'Door in the Face' नाम की एक खास मनोवैज्ञानिक टेक्निक का इस्तेमाल करके हर नई नौकरी में पहले से ज्यादा सैलरी हासिल की. यह टेक्निक कैसे काम करती है? क्या यह भारत में भी सैलरी नेगोशिएशन में फायदेमंद हो सकती है? आइए समझते हैं.

क्या है 'Door in the Face' टेक्निक?
यह एक साइकोलॉजिकल स्ट्रेटजी है, जिसे प्रसिद्ध लेखक रॉबर्ट सियालदिनी (Robert Cialdini) ने अपनी किताब "Influence" में समझाया था. यह टेक्निक बातचीत में नेगोशिएशन को प्रभावी बनाने के लिए उपयोग की जाती है.

कैसे काम करती है यह टेक्निक?

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  • पहले बड़ी मांग करें- शुरुआत में एक बड़ी और ऊंची सैलरी मांगें, जिसे कंपनी शायद मना कर दे.
  • फिर एक कम मांग रखें- जब कंपनी बड़ी सैलरी को नकार दे, तब आप एक थोड़ी कम लेकिन उचित मांग रखें, जो आपकी असली चाहत हो.
  • कंपनी को लगेगा कि यह वाजिब मांग है- जब आपकी पहली मांग बहुत ऊंची थी, तो दूसरी मांग कंपनी को अधिक जायज लगेगी और वह इसे मान सकती है.

इसका मनोवैज्ञानिक कारण यह है कि जब कोई व्यक्ति पहले कोई बड़ा अनुरोध करता है और वह अस्वीकार हो जाता है, तो अगला छोटा अनुरोध स्वाभाविक रूप से अधिक स्वीकार्य लगता है.

कैसे TJ Patel ने इस टेक्निक से ज्यादा सैलरी पाई?
TJ Patel ने इस तकनीक का इस्तेमाल कर हर नई नौकरी में पहले से ज्यादा सैलरी हासिल की. उनके नेगोशिएशन का एक उदाहरण देखें:

पहली नौकरी (जूनियर डेवेलपर)

  • कंपनी का ऑफर: $55,000 प्रति वर्ष
  • TJ Patel की पहली मांग: $70,000 
  • फाइनल सैलरी: $65,000. 

दूसरी नौकरी (सॉफ्टवेयर इंजीनियर, हेल्थ बेनिफिट कंपनी)

  • पहला ऑफर: $65,000
  • पहली मांग: $90,000
  • फाइनल सैलरी: $80,000

तीसरी नौकरी (सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर, कॉम्प्लायंस कंपनी)

  • पहला ऑफर: $88,000
  • पहली मांग: $100,000
  • फाइनल सैलरी: $100,000

चौथी नौकरी (मैग्निफिसेंट 7 कंपनी)

  • पहला ऑफर: $175,000
  • पहली मांग: $240,000
  • फाइनल सैलरी: $204,000

पांचवीं नौकरी (बिग टेक कंपनी)

  • पहला ऑफर: $190,000
  • पहली मांग: $250,000
  • फाइनल सैलरी: $223,000

'Door in the Face' से केवल सैलरी ही नहीं, कई फायदे मिलते हैं!
TJ Patel ने बताया कि उन्होंने इस तकनीक का उपयोग प्रोजेक्ट डेडलाइन्स सेट करने और कंपनी के अंदर प्रमोशन पाने के लिए भी किया.

  • डेडलाइन्स मैनेजमेंट: जब बॉस ने एक पास की डेडलाइन दी, तो उन्होंने जानबूझकर एक लंबी डेडलाइन मांगी. बाद में, एक वाजिब समय सीमा तय हुई.
  • प्रमोशन नेगोशिएशन: प्रमोशन मांगते समय, उन्होंने पहले एक बड़ा पद मांगा, जिसे कंपनी ने अस्वीकार किया, लेकिन बाद में उन्होंने एक उचित प्रमोशन और सैलरी हाइक हासिल कर ली.

क्या यह स्ट्रेटजी भारत में भी काम कर सकती है?
भारत में सैलरी नेगोशिएशन थोड़ा अलग होता है, लेकिन 'Door in the Face' टेक्निक यहां भी कारगर हो सकती है. भारतीय कंपनियों में इस स्ट्रेटेजी को आप अपना सकते हैं. लेकिन इसके लिए पहले अपने रोल के लिए औसत सैलरी रेंज का पता करें. हमेशा पहले अपने रोल के लिए टॉप सैलरी की मांग करें. अगर आपको दूसरी कंपनियों से ऑफर मिले हैं, तो उन्हें नेगोशिएशन में उपयोग करें. ऐसे में कंपनी आपको सीधे मना कर सकती है, लेकिन अगर आप सही ढंग से बातचीत करें तो वे फिर से विचार कर सकते हैं. सिर्फ सैलरी ही नहीं, बोनस, स्टॉक्स और अन्य बेनिफिट्स को भी शामिल करें.