
भीख मांगना किसी के लिए शौक नहीं हो सकता. ज्यादातर लोग मजबूरी में भीख मांगते हैं लेकिन इन दिनों चीन के युवाओं को भीख मांगने का शौक चढ़ा हुआ है.
चीन में प्लेफुल बैगिंग काफी ट्रेंड में है इसमें लोग सड़क किनारे इकट्ठा होकर सिगरेट-शराब पीते हैं और तस्वीरें लेते हैं. युवा बैगिंग लिखा हुआ बोर्ड लेकर बैठते हैं. इसका मकसद पैसा इकट्ठा करना नहीं बल्कि लोगों से जुड़ना है. दक्षिण-पश्चिमी चीन के युन्नान प्रांत के टूरिस्ट प्लेस दाली में सड़क के किनारे युवा ग्रुप्स में भीख मांगते देखे गए.
युवा सिर्फ यहां अच्छा समय बिताने आते हैं
इन लोगों के पास क्यूआर कोड भी रखे होते हैं और अक्सर ये पांच, 10 या 100 युआन ही मांगते हैं. पारंपरिक अर्थों में यह भीख मांगने जैसा नहीं है, युवा सिर्फ यहां अच्छा समय बिताने आते हैं. लोग चलते फिरते अक्सर इन्हें सिगरेट, बीयर, या स्नैक्स फ्री में देते हैं, कई लोग इन्हें पैसे भी देते हैं. बेशक इन युवाओं ने खुद को एक भिखारी की तरह पेश किया है लेकिन इन्होंने कभी लोगों से भीख नहीं मांगी है. लोग इन्हें अपनी मर्जी से ही पैसे देकर जाते हैं.
किसी को नुकसान या धोखा देने के लिए भीख नहीं मांगते
इस ट्रेंड में हिस्सा लेने वाले यांग ने कहा, हमारे ग्रुप में करीब 80 लोग हैं. यह लोगों से कनेक्ट होने का एक नया तरीका है. यह अभिव्यक्ति का एक नया रूप है और कुछ हद तक विद्रोही भी है. खुले विचारों वाले लोग या जिन्हें अपनी इमेज की परवाह नहीं वही हमारे साथ जुड़ पाते हैं. भीख मांगने के लिए किसी नियम का पालन करना ज़रूरी नहीं है, क्योंकि हम किसी को नुकसान या धोखा नहीं दे रहे हैं.
चीन में लाइंग फ्लैट कल्चर
यह ट्रेंड चीन लाइंग फ्लैट कल्चर से मेल खाती है, जहां युवा पीढ़ी काम, थका देने वाले काम के शेड्यूल और अधिक उपलब्धि के सामाजिक दबावों से निराश होकर, जीवन में कम प्रयास करने और आराम से रहने का विकल्प चुन रही है. इस ट्रेंड ने चीनी सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. कुछ लोग इसे कला का एक रूप मानते हैं, जबकि अन्य लोग आत्म-सम्मान और गरिमा के साथ इसे जोड़कर देख रहे हैं.