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सिर्फ देखना भी जुर्म! कॉमेडियन Kunal Kamra के शो में शामिल होने वाले दर्शकों को पुलिस ने भेजा नोटिस, लेकिन किस धारा के तहत?

यह मामला अब सिर्फ कुणाल कामरा तक सीमित नहीं रहा. CrPC की धारा 179 के तहत पुलिस ने शो में मौजूद दर्शकों को भी गवाह मानते हुए नोटिस भेजे हैं. भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 179 का सीधा संबंध अपराध के परिणाम और उसके न्याय क्षेत्र से है. इसका मतलब यह है कि अगर किसी अपराध का असर किसी दूसरी जगह पड़ता है, तो उस स्थान पर भी केस दर्ज किया जा सकता है और जांच हो सकती है.

कुणाल कामरा विवाद कुणाल कामरा विवाद
हाइलाइट्स
  • कुणाल कामरा का शो बना विवाद का अड्डा!

  • दर्शकों को पुलिस ने भेजा नोटिस

अगर आप सोचते हैं कि किसी कॉमेडी शो में जाकर मजे लेना और हंसना सिर्फ मनोरंजन है, तो दोबारा सोचिए! मुंबई पुलिस ने कॉमेडियन कुणाल कामरा के शो में शामिल होने वाले दर्शकों को नोटिस भेजे हैं. यह नोटिस CrPC की धारा 179 के तहत भेजे गए हैं, जो पुलिस को गवाहों को पूछताछ के लिए बुलाने का अधिकार देती है. मतलब, अगर आप किसी घटना के गवाह हैं, तो कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं!

कुणाल कामरा का शो बना विवाद का अड्डा!
कामरा के ‘नया भारत’ स्टैंड-अप स्पेशल ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है. शो में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की कथित आलोचना के बाद उनके समर्थकों ने बवाल खड़ा कर दिया. सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हुआ, धमकियां दी गईं और फिर मुंबई का मशहूर कॉमेडी वेन्यू The Habitat Studio को निशाना बनाया गया.

शिवसेना विधायक मुरजी पटेल की शिकायत पर कुणाल कामरा के खिलाफ FIR दर्ज की गई. उन्हें BNS की धारा 353(1)(b), 353(2) और 356(2) के तहत मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है. इतना ही नहीं, जब उन्होंने मुंबई आने के लिए सात दिन की मोहलत मांगी, तो पुलिस ने उनकी अपील ठुकरा दी.

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हालांकि, मद्रास हाई कोर्ट ने कामरा को 7 अप्रैल तक अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी. जस्टिस सुंदर मोहन ने माना कि उन्हें महाराष्ट्र में अदालतों तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है, इसलिए गिरफ्तारी से सुरक्षा दी गई है.

क्या सिर्फ देखना भी जुर्म है?
यह मामला अब सिर्फ कुणाल कामरा तक सीमित नहीं रहा. CrPC की धारा 179 के तहत पुलिस ने शो में मौजूद दर्शकों को भी गवाह मानते हुए नोटिस भेजे हैं. भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 179 का सीधा संबंध अपराध के परिणाम और उसके न्याय क्षेत्र से है. इसका मतलब यह है कि अगर किसी अपराध का असर किसी दूसरी जगह पड़ता है, तो उस स्थान पर भी केस दर्ज किया जा सकता है और जांच हो सकती है.

धारा 179 कहती है, "जब कोई अपराध इस तरह से किया जाता है कि उसका परिणाम किसी अन्य स्थान पर भी होता है, तो उस स्थान पर भी मुकदमा चलाया जा सकता है."

सीधे शब्दों में समझें तो अगर कोई व्यक्ति A शहर में कोई अपराध करता है, लेकिन उसका प्रभाव या परिणाम B शहर में भी होता है, तो B शहर की पुलिस और कोर्ट को भी उस अपराध की सुनवाई का अधिकार होगा.

कुणाल कामरा के मामले में पुलिस का कहना है कि दर्शकों ने ऐसे शो में भाग लिया, जिसका परिणाम राजनीतिक बवाल और पब्लिक ऑर्डर में गड़बड़ी के रूप में सामने आया. इस आधार पर दर्शकों को गवाह मानकर पूछताछ के लिए बुलाया गया है.

धारा 179 का उपयोग किन मामलों में होता है?

  • साइबर अपराध: अगर कोई व्यक्ति दिल्ली में बैठकर किसी कोलकाता निवासी को ऑनलाइन धोखा देता है, तो मामला दोनों जगहों पर दर्ज हो सकता है.
  • मानहानि: अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे के खिलाफ अपमानजनक बयान देता है, जिससे पीड़ित को अपने शहर में नुकसान होता है, तो मामला उस शहर में भी चल सकता है.
  • राजनीतिक बयान: किसी एक राज्य में दिए गए भड़काऊ भाषण का असर किसी दूसरे राज्य में दंगे या विरोध के रूप में हो सकता है, तब वहां भी केस दर्ज किया जा सकता है.

CrPC की धारा 179 यह सुनिश्चित करती है कि किसी अपराध का असर जहां तक हो, वहां तक कानून की पहुंच हो.