
लुधियाना के रहने वाले 75 वर्षीय राजिंदर सिंह कालरा जीरो-वेस्ट जीवन जी रहे हैं. कालरा भारतीय सेना और फिर बैंक से रिटायर हैं. प्रकृति और पर्यावरण के प्रति अपने गहरे प्रेम के कारण कालरा ने अपने जमालपुर बैंक कॉलोनी के घर को जीरो-वेस्ट मॉडल में बदल दिया है. कालरा ऐसा करके दूसरों के लिए मिसाल पेश कर रहे हैं.
कालरा घर के सभी कचरे, गीले और सूखे, दोनों को छत पर खाद बनाकर मैनेज करते हैं. वह अपने घर से कोई कचरा बाहर नहीं जाने देते. वह अपने पड़ोसियों के फेंके गए फूलों को भी फिर से खाद बनाने में इस्तेमाल करते हैं.
साल 2017 से शुरू किया यह सफर
कालरा ने बताया कि उन्होंने घर के बाहर अपना बगीचा लगाया था लेकिन जब सड़क को चौड़ा करने का प्लान आया तो लगा कि उनके बगीचे को हटा दिया जाएगा. लेकिन उन्होंने इसका विरोध किया और उन्हें ग्रीन बेल्ट मिल गई. उन्होंने साल 2017 में गीले कचरे से खाद बनाना शुरू किया. उन्होंने छोटे स्तर पर शुरुआत की थी लेकिन अब उनकी छत पर 16 ड्रम में जैविक खाद बनती है.
कालरा ने बताया कि नगर निगम के अधिकारियों ने भी उनके काम को देखकर उनकी सराहना की. कालरा अब वह घर पर कई तरह के फल और सब्ज़ियां उगाते हैं. उनके गार्डन में बिलासपुर से सेब के पेड़ हैं, और उन्हें अगले सीज़न में इससे फल मिलने की उम्मीद है. और सिक्किम से एक एवोकाडो का पेड़ है. वह सीमित जगह के आम बहाने का जवाब देते हुए कहते हैं कि पौधे छोटे क्षेत्रों में भी पनपते हैं. वर्तमान में, उनके पास 500 से ज़्यादा पेड़-पौधे हैं.
खुद बनाते हैं शैंपू, क्लीनिंग सॉल्यूशन्स
कालरा का कहना है कि वह घर में इतने फल और सब्ज़ियां उगा लेते हैं कि उनकी घर की जरूरत पूरी हो जाए. कालरा का टेरेस गार्डन चार भागों में बंटा है - फूल, सब्जियां, जैविक खाद उत्पादन और बायो-एंजाइम बनाना.
कालरा साइट्रस फ्रूट्स जैसे नींबू-संतरों के छिलकों से बायो-एंजाइम बनाते हैं, जो बर्तन धोने, फर्श साफ करने और कपड़े धोने के लिए बेहतरीन हैं और प्राकृतिक भी. इसके अलावा, सूखे कचरे को भी वह रिसायकल या अपसायकल करने की कोशिश करते हैं. जैसे प्लास्टिक के रैपर्स और बोतलों से वह इको-ब्रिक बनाते हैं.
उनके पास अच्छा कैक्टस कलेक्शन भी है. उनके टेरेस गार्डन में गौरैया आती हैं और कभी-कभी मोर भी आते हैं. कालरा का कहना है कि उनकी पत्नी को गार्डनिंग का शौक था लेकिन अब यह उनका भी पैशन है. अब आलम यह है कि वह कहीं बाहर जाते हैं तो खुली जगहों पर बीज डाल आते हैं ताकि पेड़ों की आबादी बढ़ सके. उनके आस-पड़ोस में हर कोई उनके घर को 'जीरो वेस्ट होम' के नाम से जानता है. वह स्थानीय संगठनों के साथ मिलकर छात्रों को प्रकृति के महत्व के बारे में शिक्षित करते हैं.