
तुलसी का पौधा भारतीय घरों में आमतौर पर पाया जाता है. यह एक मेडिसिनल और स्पिरिचुअल प्लांट है. तुलसी की दो प्रमुख किस्में होती हैं: रामा तुलसी और श्यामा तुलसी. रामा तुलसी की पत्तियां हरे रंग की होती हैं जबकि श्यामा तुलसी की पत्तियां काले रंग की होती हैं. यह पौधा एयर प्यूरीफायर और एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर होता है.
गर्मियों के मौसम में तुलसी की देखभाल करना बड़ी चुनौती होता है. अगर इस मौसम में आपका पौधा भी सूखने लगता है तो आपको ज़रूरत है घर पर बने एक फर्टिलाइजर की. आइए जानते हैं इस फर्टिलाइजर को बनाने का तरीका और तुलसी के पौधे की देखरेख से जुड़े टिप्स
तुलसी के पौधे की देखभाल के टिप्स
तुलसी के पौधे को हरा-भरा और घना रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण देखभाल के टिप्स अपनाने चाहिए. सबसे पहले, तुलसी के पौधे को 8 घंटे की धूप अवश्य मिलनी चाहिए क्योंकि यह गर्मियों का पौधा है. इसके अलावा, ओवर वाटरिंग (जरूरत से ज्यादा पानी डालने) से बचना चाहिए क्योंकि इससे पौधे की जड़ों में फंगस लग सकता है.
अगर तुलसी के पौधे में फंगस लग जाए तो हल्दी पाउडर का उपयोग करें. हल्दी पाउडर को पौधे की जड़ों के चारों ओर छिड़कने से फंगस और चीटियों से बचाव होता है.
कैसे तैयार करें घरेलू खाद?
तुलसी के पौधे को हरा-भरा और घना रखने के लिए घरेलू खाद का उपयोग करें. चाय की पत्ती और सरसों का लिक्विड फर्टिलाइज़र पौधे के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. चाय की पत्ती में नाइट्रोजन भरपूर मात्रा में होता है जो पौधे की ग्रोथ को बढ़ाता है. सरसों का लिक्विड फर्टिलाइज़र बनाने के लिए सबसे पहले एक चम्मच पिसी हुई सरसों को एक लीटर पानी में मिला दें और 24 घंटे के लिए छोड़ दें.
आप 24 घंटे बाद पाएंगे कि आपकी सरसों फर्मेंट हो चुकी है. इसके बाद आधा ग्लास सादे पानी में आधा ग्लास सरसों का फर्मेंटेड पानी मिलाएं और इस मिश्रण को अपने पौधे में डाल दें. ध्यान रहे कि आप बिना पानी मिलाए अपने लिक्विड फर्टिलाइज़र का इस्तेमाल न करें. सरसों का फर्टिलाइज़र बहुत गर्म होता है. यह आपके पौधे को नुकसान पहुंचा सकता है.
पौधे की पिंचिंग, प्रूनिंग, रिपॉटिंग
तुलसी के पौधे की पिंचिंग और प्रूनिंग भी महत्वपूर्ण है. पौधे की मुख्य शाखा की टिप को काटने से पौधा अपनी एनर्जी नीचे की शाखाओं में लगाता है जिससे पौधा घना हो जाता है. बात करें रिपॉटिंग की तो तुलसी के पौधे की रिपोर्टिंग गर्मियों में नहीं करनी चाहिए. मानसून सीज़न में या फरवरी में रिपॉटिंग और प्रूनिंग करना बेहतर होता है.