
उत्तर प्रदेश के औरैया में मां मंगला काली मंदिर में नवरात्रि के दौरान भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. यह मंदिर अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के कारण दूर-दूर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. यह मंदिर यमुना नदी के किनारे स्थित है. इस प्राचीन मंदिर में करीब 4 दशक पहले कुख्यात डाकू भी श्रद्धा से सिर झुकाते थे.
इस मंदिर में डकैत लेते थे आशीर्वाद-
बीते दौर में यह मंदिर उस समय के कुख्यात डकैतों का पसंदीदा धार्मिक स्थल हुआ करता था. फूलन देवी, विक्रम बाबू, गुंजन, बलवान और निर्भय गुर्जर जैसे कुख्यात डकैत यहाँ पर दर्शन करने के लिए आते थे. वे झंडा चढ़ाते थे और पुड़िया और मिठाइयां भी बंटवाते थे. हालांकि खूंखार डकैत भी रॉबिनहुड जैसी छवि रखते थे.
बताया जाता है कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं से वे कुछ नहीं कहते थे. पहले दस्यु की जप गोलियों से हुआ करती थी. इस मंदिर में भक्त आते थे और अपनी मन्नतें मांगते थे. इसी तरह डकैत भी आते थे और मन्नतें मांगते थे. लेकिन किसी डकैत ने कभी किसी भक्त को परेशान नहीं किया. कभी डकैतों ने भक्तों से कुछ नहीं लिया.
डकैत मंदिर में आते थे और पूजा करके चले जाते थे. ज्यादातर डकैत रात में आते थे, जबकि भक्त दिन में आते थे. लेकिन अब डकैतों का करीब-करीब खात्मा हो गया है.
प्राचीन है ये मंदिर-
यह बहुत प्राचीन मंदिर है. मंदिर के बारे में एक और लोकप्रिय मान्यता है कि जब अंग्रेज भारत में अपना शासन स्थापित कर रहे थे. इस मंदिर के पास में भटपुरा गांव था. यह मंदिर उन्हीं लोगों ने मनवाया था. 1858 में यमुना के रास्ते अंग्रेजी शासन के कुछ ही लोग जा रहे थे. इस दौरान यहां के लोगों ने उनको रोका तो अंग्रेज शासक गुस्सा हो गए और पूरे गांव को उजाड़ दिया. अंग्रेजों ने गोले फेंके. लेकिन इस गोलीबारी में मंदिर को कुछ नहीं हुआ.
इस मंदिर में 100 किलोमीटर के दायरे के भक्त आते हैं. नवरात्रि में भक्तों की भारी भीड़ लगती है. मंदिर के पास से यमुना नदी बहती है और घना जंगल भी है. इस सबके बावजूद दूर दूर से श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
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