

भारत में 51 शक्तिपीठों में से सबसे प्रमुख और शक्तिशाली शक्तिपीठ मां कामाख्या मंदिर को माना जाता है. यह मंदिर असम राज्य के गुवाहाटी शहर में स्थित है और इसे महापीठ का दर्जा प्राप्त है. इस मंदिर का उल्लेख कालिका पुराण में मिलता है, जो 10वीं-11वीं शताब्दी में लिखा गया था. इसके अनुसार, यह वही स्थान है जहां देवी सती की योनि गिरी थी. इस कारण से यहां पर माता की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि यहां एक गुफा स्थित है, जिसमें एक छोटी सी चट्टान पर योनि की आकृति उभरी हुई है. श्रद्धालु इसी आकृति के दर्शन और पूजा के लिए इस मंदिर में आते हैं.
460 पुजारी करते हैं पूजा
मां कामाख्या मंदिर का पूजा विधान अत्यधिक पवित्र और अद्वितीय माना जाता है. मंदिर के पुजारी पी. नाथ शर्मा के अनुसार, यहां की पूजा विधि लगभग 600 साल पहले तय की गई थी और आज भी उसी परंपरा का पालन किया जाता है. इस मंदिर में कुल 460 पुजारी हैं, और दिलचस्प बात यह है कि ये पुजारी अपने जीवनकाल में कभी किसी अन्य मंदिर या तीर्थ स्थल पर नहीं जाते. उनका मानना है कि कामाख्या मंदिर ही एकमात्र शक्तिपीठ है, जहां 34 करोड़ देवी-देवताओं की पूजा प्रतिदिन होती है. यह पूजा इतने बड़े पैमाने पर होती है कि इसमें 4 से 8 घंटे का समय लग जाता है.
माता सती की योनि यहां गिरी
मां कामाख्या मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण प्रतीक भी है. यह शक्तिपीठ इसलिए विशेष है क्योंकि यहां पर देवी सती की योनि का एक हिस्सा गिरा था, और इसी कारण से यहां सृष्टि की उत्पत्ति मानी जाती है. इस मंदिर में केवल एक नहीं, बल्कि तीन देवी का वास है—कामाख्या, महाकाली, और महालक्ष्मी.
भारत में साल में चार नवरात्र होते हैं—दो मुख्य और दो गुप्त. जबकि अन्य शक्तिपीठों में नवरात्र का आयोजन खुलकर होता है, कामाख्या मंदिर के गुप्त नवरात्र पूरी तरह से गुप्त रखे जाते हैं. इन नवरात्रों का समय और दिनांक पुजारियों द्वारा तय किया जाता है, और श्रद्धालुओं को इसका एहसास तब तक नहीं होने दिया जाता.
कामाख्या मंदिर में नवरात्र का आयोजन बड़े धूमधाम से किया जाता है, लेकिन यह अन्य मंदिरों से कुछ अलग है. इस मंदिर में देवी दुर्गा या जंगदम्बा की कोई मूर्ति नहीं है, नवरात्र के दौरान गर्भगृह के प्रवेश द्वार के बाहर ही मां दुर्गा का आसन स्थापित किया जाता है, और कलश स्थापना की जाती है. नवरात्र के इन नौ दिनों में मां की पूजा सुबह 4 बजे से प्रारंभ होती है.