scorecardresearch

भगवान कृष्ण के परीक्षा लेने पर राजा मयूरध्वज के सामने प्रकट हुई थी माता आरण्य, आज भी कोई भक्त यहां से खाली हाथ नहीं लौटता

आरा में स्थित मां आरण्य देवी की मंदिर को लेकर जो किदवंती है उसके अनुसार द्वापर युग में इस स्थान पर राजा मयूरध्वज राज करते थे. भगवान श्रीकृष्ण ने राजा के दान की परीक्षा लेते हुए अपने सिंह के भोजन के लिए राजा से उसके पुत्र के दाहिने अंग का मांस मांगा.

Mata arnya Devi Mandir Mata arnya Devi Mandir
हाइलाइट्स
  • आज भी कोई भक्त यहां से खाली हाथ नहीं लौटता

  • आरा की अधिष्ठात्री देवी मां आरण्य देवी की महिमा है अपरंपार

बिहार की राजधानी पटना से 60 किलोमीटर दूर भोजपुर जिले के आरा मुख्यालय में स्थित मां आरण्य देवी का मंदिर है. शहर की अधिष्ठात्री देवी के रूप में विराजमान मां आरण्य देवी के दर्शन के लिए यहां देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी लोग आते हैं. खासकर चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र में यहां भक्तों की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ती है. यह मंदिर शक्ति पीठ और सिद्धपीठ के रूप से भी जाना जाता है. मान्यता है कि जो भी भक्त माता का दर्शन करने आता है और वो सच्चे मन से अगर कोई मुरादे मांगता है तो माता रानी उसे अवश्य पूरा करती हैं.

दरअसल आरा में स्थित मां आरण्य देवी की मंदिर को लेकर जो किदवंती है उसके अनुसार द्वापर युग में इस स्थान पर राजा मयूरध्वज राज करते थे. भगवान श्रीकृष्ण ने राजा के दान की परीक्षा लेते हुए अपने सिंह के भोजन के लिए राजा से उसके पुत्र के दाहिने अंग का मांस मांगा. जब राजा और रानी मांस के लिए अपने पुत्र को आरा (लकड़ी चीरने का औजार) से चीरने लगे तो देवी ने प्रकट होकर उनको दर्शन दिए थे और माता ने आशीर्वाद देते हुए उनके पुत्र को जीवित कर दिया. जिसके बाद उस जगह पर राजा ने माता कि मूर्ति स्थापित कर इस क्षेत्र का नाम मां आरण्य देवी के नाम पर आरा रखा था. जबकि मंदिर का पौराणिक महत्व भी है. मंदिर की चर्चा मत्स्तय पुराण में भी है. संवत 2005 में स्थापित आरण्य देवी का मंदिर आरा नगर के शीश महल चौक से उत्तर-पूर्व छोर पर स्थित है. मां आरण्य देवी को आरा नगर की अधिष्ठात्री माना जाता है. इस मंदिर में वर्ष 1953 में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, सीता, भरत, शत्रुध्न व हनुमान जी के अलावा अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा स्थापित की गई है.

पांडवों और भगवान राम ने की थी मां आदिशक्ति की पूजा
बताया जाता है कि उक्त स्थल पर प्राचीन काल में सिर्फ आदिशक्ति की प्रतिमा थी. इस मंदिर के चारों ओर वन था. द्वापर युग में पांडव वनवास के क्रम में आरा में ठहरे थे. उस दौरान पांडवों ने भी मां आदिशक्ति की पूजा-अर्चना की थी. इस मंदिर में स्थापित बड़ी प्रतिमा को जहां सरस्वती का रूप माना जाता है. वहीं छोटी प्रतिमा को महालक्ष्मी का रूप माना जाता है. देवी ने युधिष्ठिर को स्वपन में संकेत दिया कि वह आरण्य देवी की प्रतिमा स्थापित करें. धर्मराज युधिष्ठिर ने मां आरण्य देवी की प्रतिमा स्थापित की. वहीं यह भी कहा जाता है कि भगवान राम, लक्ष्मण और महर्षि विश्वामित्र जब बक्सर से जनकपुर धनुष यज्ञ के लिए जा रहे थे तो सबने मां आरण्य देवी की पूजा-अर्चना की थी. इसके बाद ही वे सोन नदी को पार किए थे.

सम्बंधित ख़बरें

नवरात्र में यहां लाखों की संख्या में भक्त आते हैं
वहीं माता आरण्य देवी मंदिर के पीठाधीश्वर मनोज बाबा ने बताया कि इस मंदिर में रोजाना हजारों लोग माता के दर्शन के लिए आते हैं. खासतौर पर नवरात्र के समय में इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. माता आरण्य देवी मंदिर में जो भी भक्त श्रद्धा पूर्वक सच्चे मन से मन्नत मांगता है उसे माता अवश्य पूरा करती हैं. माता आरण्य देवी मंदिर का इतिहास काफी पुराना है. जो द्वापर और त्रेता युग के साथ-साथ शिव पुराण की कहानियों से जोड़ कर देखा जाता है. जबकि स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह भी माता का दर्शन करने के लिए यहां सुरंग के रास्ते रोज आया करते थे. 

इधर चैत्र नवरात्र के अवसर पर माता की पूजा अर्चना करने आई महिला भक्त रितू पांडेय ने कहा कि मां आरण्य देवी मंदिर में काफी दूर-दराज से लोग दर्शन करने के लिए यहां आते हैं. माता सबकी मुरादें पूर्ण करती है. मां आरण्य देवी से हमने भी अपने भाई की नौकरी के लिए मन्नत मांगा था, जिसे माता ने पूरा भी कर दिया, मैं नित्य दिन माता आरण्य देवी की पूजा अर्चना के लिए यहां आती हूं, जबकि मंदिर में आएं भक्त संतोष कुमार सिंह ने कहा कि देश विदेश में आरा का नाम है और उस नाम के पिछे मां आरण्य देवी का आशीर्वाद है. माता आरण्य देवी का आशीर्वाद पूरे शहरवासियों के ऊपर सदैव रहता है और वो इस शहर की अधिष्ठात्री देवी भी है. लेकिन मंदिर का जितना महत्व है उतनी इस मंदिर की भव्यता नहीं थी. उसके बाद‌ शहर के बुद्धिजीवी और उद्योगपति एक साथ बैठक कर पहल शुरू की और एक ट्रस्ट का गठन कर मंदिर का जिर्णोद्धार किया जा रहा है. भव्य मंदिर का निर्माण शुरू है और यह करीब 110 फीट या उससे भी उच्चा भव्य मंदिर का निर्माण कार्य किया जा रहा है. माता के मंदिर में सबकी मुरादें पूर्ण होती हैं इस लिए माता आरण्य देवी की महिमा अपरंपार मानी जाती है.
-आरा से सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट