
मुंबई के विरार स्थित जीवदानी अम्बे मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. मां जीवदानी का मंदिर विरार में जीवदानी नामक पहाड़ी पर स्थित है. पहाड़ विरार का सबसे महत्वपूर्ण स्थल है. ये देवी जीवदानी के अपने एकमात्र मंदिर के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है, यहां माता के दर्शन के लिए जो लगभग 1460 से भी अधिक सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. विरार के पूर्वी हिस्से में एक बड़े से पहाड़ी पर ये मंदिर स्थित है. यहां से पूरा मुंबई और ठाणे जिला दिखता है.
पांडवों ने की थी मंदिर की स्थापना
गुड न्यूज़ टुडे से बात करते हुए जीवदानी मंदिर के पुजारी प्रमोद महाराज ने बताया कि इस मंदिर में पांडव पधारे थे. उन्हें पहाड़ों में जीवदानी मंदिर के दर्शन हुए. उन्होंने पूजा पाठ की और मंदिर की स्थापना की. इस मंदिर को पांडवों ने अपने वनवास के समय में बनाया था. इस मंदिर पहले से बहुत ऋषि आते जाते रहे हैं. आज भी यहां अनेकों ऋषि और योगी आते रहते हैं. इस मंदिर को लेकर और भी बहुत सी कहानियां हैं.
नंगे पैर माता के दर्शन करने आते हैं भक्त
मंदिर कि सीढ़ियों पर फूल हार व पूजा की सामग्री की दुकानें लगी होती हैं. जानकारी के मुताबिक इस क्षेत्र में 17वीं सदी में जीवदानी किले का निर्माण किया गया था. उस समय किले में अनेकों पानी के कुंड हुआ करते थे. वर्तमान में अधिकतम कुंड अभी सूख गए हैं. मान्यता कुछ ऐसी है कि अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए भक्त माता की मंदिर की चढ़ाई नंगे पैर करते हैं. शुक्रवार और रविवार इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ लगती है. अब इस मंदिर तक पहुंचने के लिए लिफ्ट भी लगा दिया गया है. जिसकी सहायता से बुजुर्ग और दिव्यांग बड़ी ही सरलता से माता के दरबार में पहुंच जाते हैं.
मंदिर परिसर तक पहुंचने में काफी समय लगता है. भक्त सीढ़ियां चढ़ते समय थक ना जाए इसलिए हर थोड़े समय बाद LED स्क्रीन लगा हुआ है जिसमें माता के लाइव दर्शन किए जा सकते हैं.
नवरात्रि में होता है खास नजारा
पहाड़ों पर बसी जीवदानी मंदिर के दायें बायें स्वस्तिक और ओम के चिह्न बनाए गए हैं. साथ ही दर्शन के बाद महाभंडारा का भी हमेशा आयोजन होता है. वैसे तो हमेशा ही मंदिर में देवी भक्तों को भीड़ होती है पर नवरात्रि उत्सव में यहां का नजारा देखने लायक होता है.
-धर्मेन्द्र दुबे