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एक ऐसा मंदिर जहां एक ही गर्भ गृह में शक्ति के साथ शिव भी देते हैं दर्शन,भक्तों को मिलता है सुख और समृद्धि का आशीर्वाद, होती है हर मनोकामना पूरी

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के चकिया में स्थित प्राचीन काली मंदिर में भी लोगों को जबरदस्त भीड़ है. नवरात्रि के दिनों में दूर-दूर से लोग यहां पर विशेष रूप से आते हैं और मां काली के साथ-साथ भगवान शिव के भी दर्शन कर सुख समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मांगते हैं.

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चैत्र नवरात्र शुरू हो चुका है और ऐसे में देवी के मंदिरों में लोगों की जबरदस्त भीड़ हो रही है. नवरात्रि के मौके पर श्रद्धालु मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों के दर्शन पूजन कर रहे हैं और मनोकामना की पूर्ति के लिए आशीर्वाद मांग रहे हैं. उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के चकिया में स्थित प्राचीन काली मंदिर में भी लोगों को जबरदस्त भीड़ है. नवरात्रि के दिनों में दूर-दूर से लोग यहां पर विशेष रूप से आते हैं और मां काली के साथ-साथ भगवान शिव के भी दर्शन कर सुख समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मांगते हैं.

काशी नरेश ने कराया था मंदिर का निर्माण
दरअसल यह मंदिर काफी प्राचीन है और बताया जाता है कि साल 1829 के आस पास इस मंदिर का निर्माण तत्कालीन काशी नरेश ने कराया था. बताया जाता है कि तत्कालीन काशी नरेश के स्वप्न में खुद मां दक्षिणेश्वर काली आई थीं और उन्होंने काशी नरेश से इस मंदिर की स्थापना और उसमें अपनी मूर्ति को स्थापित करने का निर्देश दिया था. उसके बाद काशी नरेश ने यहां पर एक बड़ा तालाब बनवाया और तालाब के सामने ही मंदिर का निर्माण कराया.

मां काली के साथ-साथ मां लक्ष्मी और मां सरस्वती का भी विग्रह मौजूद
खास बात यह है कि इस मंदिर में प्रवेश करने के बाद श्रद्धालुओं को न सिर्फ शक्ति स्वरूपा मां काली के दिव्य दर्शन होते हैं. बल्कि यहां पर शक्ति के साथ-साथ शिव के भी दर्शन होते हैं. गर्भ गृह में स्थापित मां काली की प्रतिमा के ठीक सामने एक ही अरघे मे तीन तीन शिवलिंग स्थापित हैं. इस मंदिर में मां काली के साथ-साथ मां लक्ष्मी और मां सरस्वती का भी विग्रह मौजूद है. जिनके दर्शन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो जाते हैं. यही नहीं यहां पर एक विजय घंट भी है जिस पर दुर्गा सप्तशती के सभी मंत्र अंकित हैं और इस घंटे को भोर की आरती के दौरान बजाया जाता है जो 4:00 बजे भोर में होती है. इस मंदिर में स्थापित मां काली के बारे में मान्यता है कि इनके दर्शन मात्र से ही भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है. आस-पास और दूर-दूर से आने वाले भक्त यहां पर नारियल और लाल चुनरी के साथ-साथ सफ़ेद,लाल और पीले फूल मां को अर्पित करते हैं और मनोवांछित फल पाते हैं.

यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है
चंदौली जिला मुख्यालय से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर स्थित चकिया का यह काली मंदिर न सिर्फ आसपास के इलाके में प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक है. नवरात्रि के दिनों में विशेष रूप से यहां पर लोग आते हैं और मां के दर्शन के साथ-साथ भगवान शिव के भी दर्शन का लाभ लेते हैं. यहा पर प्रसाद के रूप में मां को नारियल और लाल चुनरी के साथ-साथ लाल सफेद और पीले फूल भी चढ़ाए जाते हैं. मंदिर में आने वाले श्रद्धालु एक तरफ जहां मां को नारियल और फूल अर्पित करते हैं. वहीं दूसरी तरफ गर्भ गृह में ही स्थित भोलेनाथ का जलाभिषेक कर अपनी मनोकामना के पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगते हैं. श्रद्धालु बताते हैं कि यह मंदिर काफी जागृत है और यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है.

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