
बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में परंपरागत रूप से आयोजित की जाने वाली रामकथा का शुभारंभ हो गया है. नौ दिनों तक चलने वाली इस रामचरितमानस नवाह पाठ की शुरुआत अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती द्वारा श्रृंगार गौरी के दर्शन और पूजन के बाद की गई. मान्यता है कि 1669 में मुगल शासक औरंगजेब द्वारा ज्ञानवापी मंदिर को ध्वस्त किए जाने के बाद से ही यह परंपरा जारी है, जिसमें बाबा विश्वनाथ को रामकथा सुनाई जाती है.
श्रृंगार गौरी पूजन और रामकथा का महत्व
बाबा विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी का विशेष पूजन वर्ष में केवल कुछ विशेष दिनों के लिए किया जाता है. इसी परंपरा के निर्वहन में आज संतों और भक्तों ने श्रृंगार गौरी की पूजा की और इसके बाद प्रतीक्षारत नंदी जी व बाबा विश्वनाथ का दर्शन कर रामकथा की शुरुआत की. स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने बताया कि ज्ञानवापी विध्वंस के बाद से ही हर वर्ष शिव को रामकथा सुनाने की परंपरा चली आ रही है.
उन्होंने कहा, "19 अप्रैल 1669 को जब औरंगजेब ने काशी के ज्ञानवापी मंदिर को तुड़वाया, तब से आज तक काशी के विद्वान ब्राह्मण और संत बाबा विश्वनाथ को रामकथा सुनाते आ रहे हैं. इस कथा का मूल उद्देश्य यह है कि ज्ञानवापी का भग्न मंदिर पुनः पूर्ण हो."
400 वर्षों से चली आ रही परंपरा
हालांकि, इस रामकथा का समय माघ मास में निर्धारित है, लेकिन इस वर्ष कुंभ मेले के कारण तिथि में बदलाव किया गया. संतों के अनुसार, स्वतंत्रता के बाद से परमिशन के तहत इस कथा को आयोजित किए जाने के अब 67 वर्ष पूरे हो चुके हैं, और यह 68वां वर्ष है.
रामकथा आयोजन को लेकर विशेष सुरक्षा व्यवस्था भी की गई है. संतों ने बताया कि यह कथा विशेष संकल्प के साथ होती है, जिसमें पटाखे जलाने तक की अनुमति होती है और आयोजन के लिए आवश्यक सभी सामग्री की एक सूची पहले से ही निर्धारित होती है.
श्रृंगार गौरी पूजन और दर्शन
श्रृंगार गौरी का दर्शन आम भक्त दूर से कर सकते हैं, लेकिन पूजन करने की अनुमति केवल विशेष अवसरों पर दी जाती है. इस दौरान नवरात्रि में चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विभिन्न संगठनों द्वारा श्रृंगार गौरी का विशेष पूजन किया जाता है.
स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती की विशेष टिप्पणी
स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने बताया, "श्रृंगार गौरी पूजन के बाद प्रतीक्षारत नंदी और बाबा विश्वनाथ का दर्शन किया गया, इसके बाद रामकथा प्रारंभ हुई. यह एक आध्यात्मिक संकल्प है, जो ज्ञानवापी मंदिर के पुनर्निर्माण की कामना के साथ जुड़ा है." इस 9 दिवसीय कथा में संतों और भक्तों की भारी संख्या में उपस्थिति देखी जा रही है. वाराणसी के विश्वनाथ मंदिर परिसर में श्रीमद् रामचरितमानस का नवाह पाठ पूरे विधि-विधान के साथ जारी रहेगा.
(रौशन कुमार की रिपोर्ट)