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Ramanathaswamy Temple: 'रावण को हराने के बाद भगवान राम ने की थी…’ कहानी भारत के उस मंदिर की, जहां PM मोदी रामनवमी पर करेंगे पूजा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) 6 अप्रैल को रामनवमी (Ramnavami 2025) पर तमिलनाडु के रामेश्वरम (Rameshwaram) जाएंगे. रामेश्वरम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पंबन सी ब्रिज (Pamban Bridge) का उद्घाटन करेंगे. उससे पहले पीएम मोदी रामनाथस्वामी मंदिर (Ramnathaswamy Temple) में पूजा करेंगे.

Ramnathaswamy Temple (Photo Credit: Getty) Ramnathaswamy Temple (Photo Credit: Getty)
हाइलाइट्स
  • रामनवमी पर पीएम मोदी रामेश्वरम जाएंगे

  • PM मोदी पंबन ब्रिज का उद्घटान करेंगे

30 मार्च को चैत्र नवरात्रि शुरू हो रही है. 6 अप्रैल को रामनवमी है. इसी दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तमिलनाडु जाएंगे. तमिलनाडु के रामेश्वरम में पीएम मोदी पंबन रेल ब्रिज का उद्घाटन करेंगे. ये देश का पहला वर्टिकल-सी ब्रिज है.

दो किलोमीटर से लंबे ब्रिज का पीएम मोदी उद्घाटन करेंगे. पंबन सी ब्रिज तमिलनाडु के मंडपम से समुद्र के बीच में रामेश्वरम तक बनाया गया है. मंडपम इस रूट पर भारत का आखिरी रेलवे स्टेशन है. इस ब्रिज के बनने से श्रद्धालु आराम से रामेश्वरम पहुंच पाएंगे.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रामनवमी के दिन रामेश्ववरम मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे. इस मंदिर को रामनाथस्वामी के नाम से भी जाना जाता है. भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर हजारों साल पुराना है. ये मंदिर पौराणिक रूप से भी अहमियत रखता है. आइए इस मंदिर के बारे में जानते हैं.

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पंबन ब्रिज का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2019 में इस ब्रिज की आधारशिला रखी थी. अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नए पंबन ब्रिज का उद्घाटन करेंगे. इसके बाद अप्रैल 2025 में पंबन रेल ब्रिज शुरू हो जाएगा. ये देश का पहला वर्टिकल सी ब्रिज है. ये पुल पुराने पंबन पुल की जगह लेगा. पुराना पंबन पुल 1914 में बना था.

रामनवमी से पहले पीएम मोदी पड़ोसी देश श्रीलंका जाएंगे. दो दिन के श्रीलंका दौरे के बाद प्रधानमंत्री रामनवमी पर रामेश्वरम पहुंचेगे. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रामेश्वरम में बने रामनाथस्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे. इसके बाद पीएम मोदी पंबन रेल पुल का उद्घाटन करेंगे.

Pamban Bridge
पंबन ब्रिज (Photo Credit: Getty)

रामेश्वरम मंदिर
तमिलनाडु के इस मंदिर को रामनाथस्वामी मंदिर के नाम से जाना जाता है. भगवान शिव को सपर्पित रामेश्वरम मंदिर 12 ज्योर्तिलिंग में से एक है. इस मंदिर का गलियारा दुनिया के सभी हिन्दू मंदिरों के गलियारों में सबसे लंबा है. रामेश्वरम मंदिर का गलियारा लगभग 1200 मीटर में फैला हुआ है. इस गलियारे में  1200 खूबसूरत खंभे हैं.

मंदिर का मौजूदा कंस्ट्रक्शन 17वीं शताब्दी में बनाया गया था लेकिन कुछ हिस्से ऐसे भी हैं जो हजारों साल पुराने हैं. इस मंदिर में 22 पवित्र कुंड हैं. माना जाता है कि इस सभी कुओं का पानी का स्वाद अलग-अलग है. कहा जाता है कि भगवान के दर्शन करने से पहले इन कुओं में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिल जाती है. साथ में इस पानी से नहाने से बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं.

भगवान शिव की पूजा
रामेश्वरम का रामनाथस्वामी दुनिया के चुनिंदा मंदिरों में आता है जहां शैव और वैष्णव दोनों हैं. इस मंदिर की पौराणिक अहमियत रामायण से जुड़ी है. देवी सीता को रावण लंका ले गया था. भगवान राम और लक्ष्मण वानर सेना के साथ समुद्र तट पर पहुंच गए. भगवान राम और लंका के बीच में समुद्र था. सभी लोग समुद्र को पार करने की योजना बना रहे थे.

Rameshwaram Temple
रामनाथस्वामी मंदिर (Photo Credit: Getty)

इसी दौरान श्रीराम को याद आया कि उन्होंने भगवान शंकर की आराधना नहीं की है. इसके बाद वहीं समुद्र तट के किनारे राम ने रेत से शिवलिंग बनाई और पूजा करने लगे. भगवान शिव और पार्वती ने श्री राम और वानर सेना को दर्शन दिए. भगवान शिव ने रावण से युद्ध में में जीत का आशीर्वाद दिया. श्रीराम ने भगवान शंकर से इसी जगह पर रुकने का अनुरोध किया. भगवान शंकर मान गए और इसी जगह पर ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए.

कैलाश पर्वत पर हनुमान
इसी मंदिर की स्थापना को लेकर एक दूसरी कहानी है. कहा जाता है कि रावण को हराने के बाद अयोध्या वापस लौटने से पहले राम भगवान शंकर की पूजा करना चाहते थे. यहां कोई शिव मंदिर नहीं था तो शिवलिंग लाने के लिए हनुमान जी को कैलाश पर्वत भेजा गया. हनुमान जी पूजा के समय पर शिवलिंग नहीं ला सके.

पूजा के लिए देवी सीता ने रेत से शिवलिंग बनाया. इसे रामलिंगम कहा जाता है. इसकी श्रीराम ने पूजा की. हनुमान जी जब शिवलिंग लेकर लौटे तब तक पूजा शुरू हो चुकी थी. हनुमान जी दुखी हो गए. तब भगवान राम ने उस शिवलिंग को विश्वलिंगम के रूप में स्थापित किया. राम ने पहले विश्वलिंगम की पूजा करने के निर्देश दिए. रामेश्वरम के रामनाथस्वामी मंदिर में विश्वलिंगम और रामलिंगम मौजूद हैं.