
51 शक्ति पीठों में से एक है मां शारदा शक्ति पीठ. जहां त्रिकूट पर्वत पर मां के कंठ का हार गिरा था जिससे स्थान का नाम माई हार पड़ा और कालंतर में अपभ्रंश होकर मैहर देवी नगरी के नाम से देश भर में प्रसिद्ध हुआ.
मैहर देवी में शारदे और चैत्र की नवरात्रि में श्रद्धा का सैलाब और भक्ति का भाव उमड़ता है. माना जाता है कि मां शारदे अमरता का वरदान देने वाली और बुद्धि की देवी सरस्वती स्वरूपा हैं. मैहर घराने के संस्थापक और संगीत सम्राट उस्ताद बाबा अलाउद्दीन खान इसके उदाहरण हैं. अलाउद्दीन खान ने अपनी संगीत यात्रा यहीं से शुरू की थी.
1063 सीढ़ियां चढ़कर दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु
आज भी सबसे पहले अमर आल्हा सुबह माता की पूजा करके चले जाते हैं. मैहर के त्रिकूट पर्वत पर सप्तमी को रोजाना की तरह सुबह चार बजे आरती पूजन और भजन होता है. माता के भव्य दिव्य दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु कोसो दूर से आते हैं. कुछ श्रद्धालु पैदल चलकर मंदिर की 1063 सीढ़ियां चढ़कर त्रिकूट पर्वत के गर्भ गृह में विराजी मां शारदा देवी के दर्शन करते हैं.
दुर्गा के विकराल रूप की पूजा
माना जाता है चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां काली की पूजा होती है, जिन्हें कालरात्रि भी कहा जाता है. महा सप्तमी के दिन मां दुर्गा के विकराल रूप की पूजा होती है और भक्त उनसे अपने दुखों को दूर करने का आशीर्वाद मांगते हैं. मां के इस रूप की खास बात ये है कि ये रात जितनी काली और निशा जैसी नीली है. मां का पूरा शरीर गुस्से से नीला प्रतीत पड़ता है जिसमे मां ने राक्षसों का रक्तपान करती नजर आती हैं.
नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा
माता कालरात्रि का रूप बहुत ही विकराल है क्योंकि माता दुर्गा का 7वां अवतार कालरात्रि पापियों का संहार करने के लिए धरती पर हुआ था. माता कालरात्रि की पूजा में रात की रानी का फूल चढ़ाने का विधान है साथ ही कालरात्रि को गुड़, गुड़ से बनी चीजों या मालपुए का भोग लगाया जाता है.
-वेंकटेश द्विवेदी