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अब नहीं बढ़ेगा प्रदूषण! जापान के रिसर्चर्स ने बनाया खारे पानी में घुलने वाला अनोखा प्लास्टिक

जापान में RIKEN सेंटर फॉर इमर्जेंट मैटर साइंस (CEMS) में ताकुज़ो ऐडा ने रिसर्चर्स के साथ मिलकर एक नए प्रकार का प्लास्टिक विकसित किया है जो इस्तेमाल करने में मजबूत है.

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प्लास्टिक हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा है क्योंकि यह बहुत मजबूत होता है और लंबे समय तक चलता है. लेकिन जब बात प्लास्टिक को डिस्पोज करने की आती है तो यह बड़ी पर्यावरण समस्या बन जाता है. प्लास्टिक केमिकल प्रोसेस से बनता है, और इसका निपटान करना आसान नहीं है. इसिए आज यह दुनिया की सबसे बड़ी प्रदूषण समस्याओं में से एक है. प्लास्टिक पर्यावरण में दशकों या सदियों तक रह सकते हैं, और माइक्रोप्लास्टिक के जरिए वन्यजीवों और मनुष्यों को नुकसान पहुंचता है.  

इस समस्या से निपटने के प्रयास में, जापान में RIKEN सेंटर फॉर इमर्जेंट मैटर साइंस (CEMS) में ताकुज़ो ऐडा ने रिसर्चर्स के साथ मिलकर एक नए प्रकार का प्लास्टिक विकसित किया है जो इस्तेमाल करने में मजबूत है. लेकिन बात जब इसके निपटान की हो तो यह सॉल्टवार यानी खारे पानी में जल्दी से घुल जाता है. घुलने के बाद, प्लास्टिक हानिरहित कंपाउंड में टूट जाता है, जिससे पर्यावरण पर इसका प्रभाव कम हो जाता है. 

बायोडिग्रेडेबल है नया प्लास्टिक 
इस नए प्लास्टिक को सामान्य प्लास्टिक जितना ही मजबूत और लचीला बनाया गया है, लेकिन इसमें 8.5 घंटे के भीतर खारे पानी में पूरी तरह घुलने की अनोखी क्षमता है. पारंपरिक प्लास्टिक के विपरीत, जिसे टूटने में सैकड़ों साल लगते हैं और जो हानिकारक माइक्रोप्लास्टिक छोड़ता है, यह नया प्लास्टिक कोई जहरीला कचरा नहीं छोड़ता है और पर्यावरण के लिए सुरक्षित है. अपनी नई स्टडी में, ऐडा और उनकी टीम ने प्लास्टिक के नॉन-बायोडिग्रेडेबल होने की समस्या को सुपरमॉलेक्यूलर प्लास्टिक-पॉलिमर के साथ हल किया. 

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नए प्लास्टिक दो आयनिक मोनोमर्स को मिलाकर बनाए गए थे जो क्रॉस-लिंक्ड सॉल्ट ब्रिज बनाते हैं, इससे मजबूती मिलती है. शुरुआती ट्रायल्स में, मोनोमर्स में से एक सोडियम हेक्सामेटाफॉस्फेट नामक एक आम फूड एडिटिव था और दूसरा ग्वानिडिनियम आयन-बेस्ड मोनोमर्स था. जब प्लास्टिक कंपाउंड्स में टूट जाता है तो इन दोनों मोनोमर्स को बैक्टीरिया पचा सकते हैं. इससे इस प्लास्टिक की बायोडिग्रेडेबिलिटी साबित होती है. 

नए प्लास्टिक के फायदे
1. पर्यावरण के अनुकूल: यह पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता.
2. समुद्री प्रदूषण को कम करता है: पानी में प्लास्टिक का कचरा नहीं रहेगा.
3. वन्यजीवों के लिए सुरक्षित: समुद्री जानवर हानिकारक माइक्रोप्लास्टिक नहीं खाएंगे.
4. मज़बूत और उपयोगी: निपटान से पहले सामान्य प्लास्टिक की तरह ही काम करता है.

हालांकि एक चिंता यह है कि अगर प्लास्टिक गलती से खारे पानी को छू जाए तो यह बहुत जल्दी घुल सकता है. वैज्ञानिकों ने इसे बचाने के लिए एक विशेष कोटिंग लगाकर इस समस्या का समाधान किया है. प्लास्टिक को जल्दी टूटने से बचाने के लिए कोटिंग की जाती है. जब इसे निपटाने का समय आता है, तो सतह को खरोंचने से खारा पानी अंदर चला जाता है. कोटिंग खरोंचने के बाद, प्लास्टिक रात भर समुद्र में पिघल जाता है.