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Nepal: नेपाल में राजशाही समर्थकों का हिंसक प्रदर्शन, पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर सरकार ने कसा शिकंजा, सुरक्षा घटाई और लगाया जुर्माना 

Nepal Government: नेपाल सरकार भले ही प्रदर्शनकारियों को लेकर सख्त तेवर दिखा रही है, लेकिन काठमांडू में एक बार फिर से प्रदर्शन कर एक तरह से राजशाही समर्थकों ने सरकार को चुनौती देने का काम किया है. अब सवाल उठ रहा है कि क्या नेपाल में फिर राजशाही की बहाली होगी?

 Demonstration in Nepal Demonstration in Nepal
हाइलाइट्स
  • 17 साल बाद अब एक बार फिर से नेपाल में राजशाही बहाली और हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग 

  • राजशाही समर्थकों के हिसंक प्रदर्शन में दो लोगों की मौत और 110 से अधिक लोग हुए घायल 

Nepal Protest: नेपाल में राजशाही के समर्थकों और सरकार के बीच खुलकर तनातनी सामने आ गई है. एक तरफ जहां सरकार हिंसा में शामिल लोगों और पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर एक्शन ले रही है तो वहीं राजशाही समर्थकों ने 3 अप्रैल 2025 तक का अल्टीमेटम सरकार को दे रखा है. अब सवाल उठ रहा है कि क्या नेपाल में फिर राजशाही की बहाली होगी?

सरकार को दी खुली चुनौती
नेपाल सरकार भले ही प्रदर्शनकारियों को लेकर सख्त तेवर दिखा रही है, लेकिन काठमांडू में एक बार फिर से प्रदर्शन कर एक तरह से राजशाही समर्थकों ने सरकार को चुनौती देने का काम किया है. शुक्रवार को राजधानी काठमांडू में राजशाही के समर्थन में शुरू हुआ प्रदर्शन देखते ही देखते हिंसक रूप लेता गया. इस हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई और 110 से अधिक लोग घायल हो गए. कई मकानों में आगजनी की और लूटपाट की घटनाएं भी सामने आईं.

पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर सरकार का शिकंजा
हिंसक प्रदर्शन के बाद नेपाल सरकार ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर कड़े कदम उठाए हैं. सरकार ने उनकी सुरक्षा को पूरी तरह से बदल दिया है और सुरक्षा कर्मियों की संख्या घटाकर 25 से 16 कर दी है. इसके अलावा, काठमांडू नगर निगम ने हिंसा के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए पूर्व राजा पर 7,93,000 नेपाली रुपए का जुर्माना लगाया है.

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हिंदू राष्ट्र की मांग पर बहस
नेपाल में राजशाही की बहाली और हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग भी जोर पकड़ रही है. मौजूदा सरकार में शामिल नेपाली कांग्रेस के मुताबिक, राजशाही बहाली तो संभव नहीं है, लेकिन हिंदू राष्ट्र के मुद्दे पर पार्टी में सकारात्मक बहस चल रही है. नेपाली कांग्रेस के एक नेता ने कहा, हम सभी धर्मों को स्वतंत्रता देना चाहते हैं, लेकिन हिंदू धर्म का संरक्षण और संवर्धन भी होना चाहिए.

सरकार का क्या है रुख
नेपाल के गृह मंत्रालय ने राजशाही समर्थकों को सख्त चेतावनी दी है. मंत्रालय ने कहा, सरकार संविधान में धर्मनिरपेक्षता के प्रति प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं करेगी. नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री ने भी कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने के मूड में है, लेकिन हिंदू राष्ट्र का मुद्दा उसके लिए पेंचीदा साबित हो सकता है.

कब हुई थी राजशाही समाप्त
नेपाल में 28 मई 2008 को नव निर्वाचित संविधान सभा ने 240 साल पुरानी राजशाही को समाप्त करते हुए देश को एक संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया था. राजशाही खत्म होने के करीब 17 साल बाद अब एक बार फिर से यहां राजशाही बहाली और हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग की जा रही है.