scorecardresearch

Ramakien: भारत में रामायण... थाईलैंड में रामकियेन... दो संस्कृतियों को जोड़ती है यह एक कथा

आज आपको रामायण के कई अलग-अलग रूप मिल जाएंगे और इनमें एक फेमस है- थाईलैंड का रामकियेन, या 'राम की महिमा.'

Thai Ramayana shines during PM Modi’s Bangkok visit Thai Ramayana shines during PM Modi’s Bangkok visit

महाकाव्य रामायण भारतीय संस्कृति और इतिहास का अहम हिस्सा है. लेकिन क्या आपको पता है कि महाकाव्य रामायण भारत की भूमि से भी बहुत दूर तक फैल चुका है और कई देशों की संस्कृति का अभिन्न अंग बन चुका है. जी हां, आज आपको रामायण के कई अलग-अलग रूप मिल जाएंगे और इनमें एक फेमस है- थाईलैंड का रामकियेन, या 'राम की महिमा.' रामायण पर आधारित रामकियेन, सदियों से थाईलैंड के साहित्य, कला और शाही परंपराओं को प्रभावित कर रहा है. 

भारत के प्रधानमंत्री BIMSTEC शिखर सम्मेलन 2025 के लिए इंडोनेशिया की यात्रा पर हैं. बिम्सटेक सात दक्षिण एशियाई और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का एक समूह है जो इन देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करता है. इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी के लिए थाईलैंड में रामकियेन का मंचन किया गया. यह दोनो देशों के लिए महत्वपूर्ण पल था कि कैसे भारत और थाईलैंड की संस्कृति के बीच रामकथा सेतू का काम कर रही है. 

भारत से थाईलैंड की यात्रा
सदियों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से रामायण थाईलैंड में आई, विशेष रूप से शुरुआती खमेर और अयुथया काल के दौरान. लेकिन यह राजा राम I (1737-1809) के समय था, जब रामकियेन को औपचारिक रूप से फिर से लिखा गया और थाई रीति-रिवाजों के अनुरूप ढाला गया. राजा राम I चकरी राजवंश के संस्थापक थे. 

सम्बंधित ख़बरें

उनके बाद, राजा राम II ने इसके काव्यात्मक और नाटकीय पहलुओं को विकसित करते हुए इस पर विस्तार से लिखा. रामकियेन अभी भी थाईलैंड का राष्ट्रीय महाकाव्य है, जो इसकी सांस्कृतिक विरासत में गहराई से निहित है. 

रामकियेन मूल रूप से रामायण जैसी ही कहानी है - वीर फ्रा राम (राम), उनकी पत्नी नांग सिदा (सीता), और राक्षस राजा थोत्सकन (रावण). फिर भी, थाईलैंड के संस्करण में कुछ अलग बातें पेश की गई हैं. जैसे रामायण के विपरीत, रामकियेन में हनुमान न सिर्फ एक वफादार सेवक हैं, बल्कि वह बहुत चुलबुले और चंचल योद्धा भी हैं. रामकियेन के हनुमान ब्रह्मचारी नहीं है बल्कि प्रेम-प्रसंग भी करते हैं. थाई महाकाव्य में फ्रा राम को बौद्ध और हिंदू आदर्शों वाले आदर्श राजा के रूप में दर्शाया गया है. 

थाई संस्कृति में रामकियेन
रामकियेन थाईलैंड की संस्कृति में रची-बसी हुई है. थाईलैंड के नृत्य-नाटक, खोन में रामकियेन का प्रभाव देखा जा सकता है, जहां नकाबपोश कलाकार इस महाकाव्य के दृश्यों को पेश करते हैं. थाई मंदिरों में भी इस महाकाव्य के चित्र उकेरे गए हैं. विशेष रूप से बैंकॉक के वाट फ्रा काऊ (पन्ना बुद्ध का मंदिर) में, जहां पूरे महाकाव्य को उत्कृष्ट रूप से चित्रित किया गया है.

हालांकि, थाईलैंड एक बौद्ध राष्ट्र है, फिर भी रामकियेन को इसकी राष्ट्रीय विरासत के हिस्से के रूप में मनाया जाता है. यह हिंदू और बौद्ध संस्कृतियों के बीच एक सेतू है, जो दर्शाता है कि कैसे कहानियों की कोई सीमा नहीं होती है, वे खुद के प्रति सच्चे रहते हुए नई संस्कृतियों को अपनाती हैं. फ्रा राम, नांग सिदा और थोत्सकन की कहानी कोई अतीत का किस्सा नहीं है बल्कि यह एक जीवंत महाकाव्य है, जो थाईलैंड की आत्मा में समाया हुआ है.